रूसी वैज्ञानिकों ने खोजे आर्कटिक का प्रदूषण साफ करने वाले बैक्टीरिया

Close up of frozen Arctic soil where scientists discovered new bacteria strains capable of eating petroleum and heavy metals.
वैज्ञानिकों ने आर्कटिक में ऐसे सूक्ष्मजीव खोजे हैं, जो करीब 5°C तापमान में भी मिट्टी से भारी धातुओं और पेट्रोलियम घटकों को प्राकृतिक रूप से तोड़ सकते हैं।

आर्कटिक की जमा देने वाली ठंड के बीच वहां की मिट्टी सालों से भारी धातुओं और पेट्रोलियम रिसाव का बोझ ढो रही है। अब कोला साइंस सेंटर के रूसी शोधकर्ताओं ने ऐसे खास सूक्ष्मजीव खोजे हैं, जो इस प्रदूषण को प्राकृतिक रूप से कम कर सकते हैं। मूरमान्स्क क्षेत्र में मिली यह नई प्रजाति आर्कटिक जैसी मुश्किल परिस्थितियों के लिए एक बड़ी उम्मीद है।

ये खास सूक्ष्मजीव पेट्रोलियम घटकों को तोड़कर (degrade करके) प्रदूषण के स्तर को नीचे लाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये बैक्टीरिया कम तापमान (करीब 5°C) में भी सक्रिय रहते हैं।

सफाई के आम तरीके यहां क्यों फेल हो जाते हैं?

आर्कटिक का पर्यावरण बहुत संवेदनशील है और वहां हमेशा बर्फ की परत जमी रहती है। ऐसी कठोर जलवायु में प्रदूषित मिट्टी को बड़ी मशीनों से हटाकर जलाना या रसायनों से साफ करना बिल्कुल व्यावहारिक नहीं है। कम तापमान के कारण वहां खुद-ब-खुद होने वाली प्राकृतिक सफाई की प्रक्रिया भी बेहद धीमी पड़ जाती है।

इस समस्या की जड़ तक जाने के लिए वैज्ञानिकों ने माउंट कास्कामा का रुख किया, जो लंबे समय से इस प्रदूषण का शिकार है। जांच में सामने आया कि वहां की मिट्टी में पेट्रोलियम की मात्रा सामान्य से 160 गुना तक ज्यादा थी। तांबे, निकल और कैडमियम जैसी भारी धातुएं भी वहां सुरक्षा मानकों से काफी ऊपर पाई गईं।

गहरी परतों में बिना ऑक्सीजन के सफाई

वैज्ञानिकों ने अलग-अलग जगहों से मिट्टी के नमूने लेकर 10 सबसे सक्रिय बैक्टीरिया की पहचान की है। ये सूक्ष्मजीव डीजल और कच्चे तेल के हिस्सों को अपने भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं और धातुओं के बीच भी आसानी से जिंदा रह सकते हैं। ‘स्यूडोमोनास’ और ‘पेनिबैसिलस’ प्रजाति के कुछ बैक्टीरिया बिना ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी काम कर सकते हैं, जिससे गहरी मिट्टी की परतों में सफाई संभव होती है।

यह प्रक्रिया मिट्टी की सफाई को तेज कर सकती है, लेकिन यह धीरे-धीरे होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। सबसे बड़ी राहत यह है कि ये बैक्टीरिया बाहर से नहीं लाए गए हैं, बल्कि इसी इलाके के मूल निवासी हैं। क्या भविष्य में हम बड़े पर्यावरण संकटों को सुलझाने के लिए रसायनों के बजाय पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर हो सकते हैं?

By Muhammad Sultan

मैं मुहम्मद सुल्तान हूँ, एक पैशनेट न्यूज़ राइटर। 'Global Update Today' के ज़रिए मेरी कोशिश रहती है कि दुनिया के हर कोने से साइंस, स्पेस और करंट अफेयर्स की वो ख़बरें आप तक लाऊँ, जो आपके लिए जानना ज़रूरी हैं। मेरी लिखी ख़बरों में आपको हमेशा डीप रिसर्च और आसान भाषा मिलेगी।

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