क्या अफ्रीका नहीं, यूरोप में इंसान ने पहली बार चलना सीखा? 7.2 मिलियन वर्ष पुराने जीवाश्म ने छेड़ी नई बहस

Azmaka femur fossil Bulgaria 7.2 million years bipedalism Graecopithecus
बुल्गारिया के अज़माका स्थल से प्राप्त 7.2 मिलियन वर्ष पुराना फीमर जीवाश्म FM3549AZM6, जो मानव के सीधे चलने की शुरुआत का सबसे पुराना यूरोपीय प्रमाण हो सकता है। (Credit: National Museum of Natural History, Bulgarian Academy of Sciences)

दशकों से वैज्ञानिक यह मानते आए हैं कि मानव का जन्मस्थान अफ्रीका है और वहीं हमने पहली बार दो पैरों पर चलना सीखा। लेकिन 4 मार्च 2026 को प्रकाशित एक शोध ने इस मान्यता की नींव हिला दी है। बुल्गारिया के अज़माका में मिली एक जांघ की हड्डी, अफ्रीका में अब तक के सबसे स्पष्ट द्विपाद प्रमाण ‘ओरोरिन’ (6 मिलियन वर्ष) से भी दस लाख वर्ष पहले यूरोप में सीधे चलने का संकेत दे रही है।

बुल्गारिया के अज़माका में ऐतिहासिक खोज और शोधकर्ता

बुल्गारिया के चिर्पन शहर के पास स्थित अज़माका साइट पर एक जांघ की हड्डी (फीमर) का जीवाश्म प्राप्त हुआ है। ‘पेलियोबायोडायवर्सिटी एंड पेलियोएनवायरनमेंट्स’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह जीवाश्म लगभग 7.2 मिलियन वर्ष पुराना है।

यह फीमर जीवाश्म (नमूना FM3549AZM6) वर्ष 2016 में खुदाई के दौरान मिला था। शोध के प्रमुख लेखकों में बुल्गारिया के राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के प्रो. निकोलाई स्पासोव, जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टूबिंगन स्थित Senckenberg Centre for Human Evolution and Palaeoenvironment की प्रो. मेडेलाइन बोहमे और कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी के प्रो. डेविड आर. बेगन शामिल हैं। वैज्ञानिकों ने इस जीवाश्म को अस्थायी रूप से ‘ग्रेकोपिथेकस’ (Graecopithecus) प्रजाति का हिस्सा माना है।

डेटा और टाइमलाइन की स्पष्ट तस्वीर

अध्ययन में दर्ज किए गए प्रमुख वैज्ञानिक तथ्य स्पष्ट करते हैं कि मानव उत्पत्ति का इतिहास कितना जटिल है:

  • बुल्गारिया में खोज: अज़माका साइट से फीमर (7.2 मिलियन वर्ष) और एक ऊपरी दांत (7.24 मिलियन वर्ष) मिला है।ग्रीस में खोज: एथेंस के पास पिरगोस वासिलिसिस से 7.175 मिलियन वर्ष पुराना ‘ग्रेकोपिथेकस’ का निचला जबड़ा मिल चुका है।
  • 70 हज़ार वर्ष का दायरा: शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि ये तीनों जीवाश्म (अज़माका-4, अज़माका-6 और पिरगोस वासिलिसिस) मेसिनियन चरण के प्रारंभिक 70,000 वर्षों तक ही सीमित हैं।

विकासक्रम की तुलनात्मक तालिका:

विशेषताग्रेकोपिथेस (अज़माका)साहेलेंथ्रोपस (चाड)ओरोरिन (केन्या)
आयु~7.2 मिलियन वर्ष~7 मिलियन वर्ष~ 6 मिलियन वर्ष
स्थानबुल्गारिया, यूरोपचाड, अफ्रीकाकेन्या, अफ्रीका
जीवाश्म प्रकारफीमर (जांघ)खोपड़ी + फीमरफीमर + दांत
द्विपादिता के संकेतहाँ (संक्रमणकालीन)विवादितहाँ (स्पष्ट)
पर्यावरणसवाना (यूरोप)सवाना (अफ्रीका)अज्ञात / अफ्रीका

शारीरिक संरचना: क्या कहता है यह जीवाश्म?

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जीवाश्म संभवतः एक मादा व्यक्ति का है जिसका शरीर भार लगभग 23-24 किलोग्राम रहा होगा। हड्डी का गर्दन-शाफ्ट कोण (Neck-Shaft Angle) 122 डिग्री है — जो आस्ट्रेलोपिथेकस और आधुनिक मानव के बीच का है, और अफ्रीकी वानरों से स्पष्ट रूप से कम है।

इसकी ‘फेमोरल नेक’ का भीतरी हिस्सा लंबा है और अफ्रीकी वानरों की घुमावदार हड्डियों के विपरीत, यह लगभग सीधा है। सांख्यिकीय विश्लेषण इसे पोरों के बल चलने वाले वानरों और ज़मीन पर सीधे चलने वाले जीवों के बीच की एक संक्रमणकालीन अवस्था के रूप में दर्शाता है।

उल्लेखनीय है कि शोधकर्ताओं ने चाड के ‘साहेलेंथ्रोपस’ (जिसे पहले सबसे पुराना होमिनिन माना जाता था) से भी इस जीवाश्म की तुलना की। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि अज़माका होमिनिन साहेलेंथ्रोपस से अधिक स्पष्ट रूप से द्विपाद जीवनशैली के अनुकूलित था।

इवोल्यूशन की कड़ी और पूर्वजों का संदर्भ

शोधकर्ता इसे जर्मनी के हैमरश्मीडे स्थल के ‘डेनुवियस गुग्गेन्मोसी’ — जो पेड़ों पर रहने वाले मियोसीन होमिनिड्स में गिना जाता है — और केन्या के छह मिलियन वर्ष पुराने ‘ओरोरिन’ के बीच की एक संक्रमणकालीन कड़ी मानते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ग्रेकोपिथेकस के संभावित पूर्वज आठ से नौ मिलियन वर्ष पुराने बाल्कन-अनातोलियन वानर ‘उरानोपिथेकस’ और ‘अनाडोलुवियस’ थे, जो खुले घास के मैदानों से जुड़े थे।

जलवायु परिवर्तन और अफ्रीका की ओर पलायन

तलछट विश्लेषण बताता है कि यह मादा होमिनिन एक मौसमी नदी के बाढ़ के मैदान के निकट रहती थी, जहाँ अर्ध-शुष्क जलवायु में वर्षा और सूखे का चक्र चलता था — ठीक वैसे ही जैसा आज के पूर्वी अफ्रीकी सवाना में होता है। शोध बताता है कि सात से छह मिलियन वर्ष पूर्व पश्चिमी एशिया में आवधिक मरुस्थलों के विस्तार के कारण यूरेशियाई स्तनधारियों की कई लहरें अफ्रीका की ओर बढ़ीं।

वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि ये होमिनिन भी इसी दौरान अरब प्रायद्वीप के रास्ते अफ्रीका की ओर दक्षिण गए होंगे। हालाँकि, कुछ आलोचकों का मानना है कि ग्रेकोपिथेकस के जीवाश्म दुर्लभ हैं और यह अफ्रीका-उत्पत्ति के सर्वमान्य सिद्धांत को पूरी तरह खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

फिर भी, अज़माका फीमर यह मजबूती से स्थापित करता है कि सीधे चलने की प्रक्रिया यूरेशिया के बाल्कन में विकसित हुई हो सकती है, जो मानव विकास के इतिहास का एक नया और रोमांचक अध्याय है।

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