यॉर्कशायर की ‘निड (River Nidd)’ नदी के किनारे घुटनों तक कीचड़ में खड़े एड्रियन स्टर्डी के हाथ में एक टहनी है। उस टहनी पर सफेद रंग के फटे हुए चिथड़े लटके हैं—ये ‘बेबी वाइप्स’ हैं। एड्रियन भारी मन से कहते हैं, “जब बाढ़ आती है, तो ये वाइप्स पेड़ों पर छह-छह फीट ऊपर तक फंस जाते हैं। यह इस बात का सबूत है कि हमारी नदियों में कचरा और सीवेज किस कदर घुल चुका है।”
यह दृश्य 2026 के इंग्लैंड का है। गुरुवार को जारी ताज़ा आंकड़ों ने उस हकीकत को फिर से चर्चा में ला दिया है, जो देश की जल प्रणालियों की सेहत पर गंभीर सवाल उठाती है।
आंकड़ों के पीछे की तस्वीर
साल 2025 इंग्लैंड के लिए मौसम के लिहाज़ से एक पहेली जैसा रहा। यह पिछले 100 से अधिक वर्षों का सबसे सूखा बसंत था और रिकॉर्ड पर सबसे गर्म साल भी। कम बारिश का मतलब था कि सीवेज ओवरफ्लो (Storm Overflows) की घटनाएं कम होनी चाहिए थीं। आंकड़ों में यह दिखा भी—2024 के मुकाबले स्पिल्स में 35% की गिरावट दर्ज की गई।
लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार किसी बड़े ढांचागत बदलाव से ज्यादा ‘बादलों की बेरुखी’ की देन है। जब बारिश ही नहीं हुई, तो सिस्टम पर दबाव कम रहा। असल चिंता यह है कि इतने सूखे साल में भी देश की नदियों और समुद्रों में 291,492 बार कच्चा सीवेज (Raw Sewage) बहाया गया।
वाइल्डलाइफ एंड कंट्रीसाइड लिंक के सीईओ रिचर्ड बेनवेल कहते हैं, “जब सूखे साल में भी सीवेज करीब 3 लाख बार बहाया जा रहा हो, तो यह सिस्टम की गहरी कमियों को दर्शाता है।”
डेटा विश्लेषण: कौन सी कंपनियां और कितना बहाव?
एनवायरनमेंट एजेंसी (EA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सीवेज बहाने की कुल अवधि (Duration) गिरकर 18 लाख घंटे रह गई, जो 2024 में 40 लाख घंटे थी। हालांकि यह गिरावट बड़ी दिखती है, लेकिन इसके पीछे के कारणों पर बहस जारी है।
यॉर्कशायर वाटर के मामले में, 2025 में सीवेज स्पिल्स की संख्या 51,404 रही, जो पिछले साल 88,164 थी। हालांकि, जल उद्योग का कहना है कि स्पिल में कमी का एक कारण इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ा निवेश भी है। वे इसे केवल मौसम का असर नहीं मान रहे हैं।
स्पिल ड्यूरेशन (2025 के प्रमुख आंकड़े):
- South West Water: 407,006 घंटे
- United Utilities: 327,453 घंटे
- Yorkshire Water: 285,931 घंटे
- Thames Water: 107,822 घंटे
कानूनी पेच और इकोसिस्टम पर असर
रिवर्स ट्रस्ट की तकनीकी निदेशक मिशेल वॉकर ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु उठाया है। नियमों के मुताबिक, सीवेज को केवल ‘असाधारण परिस्थितियों’ जैसे भारी बारिश में ही बहाया जाना चाहिए।
मिशेल का कहना है कि कई मामलों में यह डिस्चार्ज नियमों के खिलाफ हो सकता है, खासकर जब यह बिना भारी बारिश के हो। जब नदियों में पानी का स्तर पहले से ही कम होता है, तब उसमें सीवेज डालना इकोसिस्टम पर गंभीर और अधिक नुकसानदायक असर डालता है। इससे पानी में मौजूद जीवों के लिए ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
इसके साथ ही, गर्म दिनों में जब लोग गर्मी से राहत पाने के लिए जल निकायों का रुख करते हैं, तो यह सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा करता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और निवेश का भारी बोझ
इस संकट की जड़ में दशकों से इंफ्रास्ट्रक्चर और निगरानी की कमियों पर सवाल उठ रहे हैं। कैंपेनर्स का कहना है कि 2018 के मुकाबले आज भी सीवेज डिस्चार्ज के घंटे बहुत ज्यादा हैं।
जल कंपनियों ने अब सुधार के लिए £104 बिलियन के निवेश का वादा किया है। इस निवेश का उद्देश्य बड़े स्टोरेज टैंक बनाना और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाना है। लेकिन इस बड़े निवेश की कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है। अगले पांच सालों में ग्राहकों के पानी के बिल औसतन 36% तक बढ़ने का अनुमान है। यानी सफाई की इस भारी भरकम लागत का बोझ सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।
सरकार की भूमिका और भविष्य के लक्ष्य
सरकार ने अब स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कुछ कड़े कदम उठाने का दावा किया है। जल मंत्री एम्मा हार्डी के अनुसार, अब ‘नो-नोटिस’ (बिना बताए) निरीक्षण और ‘MOT-style’ चेक की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, अधिकारियों के अनुचित बोनस पर रोक और जांच में बाधा डालने पर जेल की सजा जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
सरकार ने लक्ष्य रखा है कि हर ‘स्टॉर्म ओवरफ्लो’ साल में 10 से अधिक बार इस्तेमाल न हो। फिलहाल यॉर्कशायर जैसे इलाकों में यह औसत 40 बार प्रति वर्ष है। इसे कम करने के लिए पूरे सीवेज नेटवर्क के आधुनिकीकरण की जरूरत होगी।
एक विचारणीय प्रश्न
तमाम तकनीकी निवेश और नए कानूनों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम अपनी नदियों को केवल ‘पाइपलाइनों का जाल’ मान रहे हैं या एक जीवित तंत्र?
क्या सिर्फ बारिश के कम होने को ‘प्रगति’ मान लेना सही है, या हमें अपनी नदियों के प्राकृतिक स्वास्थ्य के लिए अधिक कड़े और पारदर्शी मानकों की जरूरत है?

