1972 में Apollo 17 के बाद इंसान फिर कभी चाँद के पास नहीं गया।
नासा का Artemis II मिशन इंसान को एक बार फिर चाँद के करीब ले जाने की तैयारी है। अंतरिक्ष यात्री Orion spacecraft नाम के क्रू कैप्सूल में सफर करेंगे।
मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं: रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन। ये अंतरिक्ष यात्री एक फ्री-रिटर्न फ्लाईबाय के ज़रिए चाँद के पीछे से घूमकर सीधे पृथ्वी पर वापस आएंगे। नासा के मिशन प्लान के अनुसार इन 10 दिनों में अंतरिक्ष यात्री कई परीक्षण, अभ्यास और अवलोकन करेंगे।
उड़ान का पहला दिन: रवानगी और पहली नींद
धरती छोड़ने के बाद का पहला दिन सिर्फ खुद को संभालने का है। लॉन्च के बाद अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में पहुंचेंगे। उनका पहला काम ओरियन स्पेसक्राफ्ट के माहौल में खुद को ढालना होगा। इसके बाद टीम साढ़े चार घंटे की नींद लेगी और पहले दिन का समापन करेगी।
उड़ान का दूसरा दिन: इंजन फायरिंग और चाँद का रास्ता
दूसरे दिन काम का दबाव बढ़ जाएगा। अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन और विक्टर ग्लोवर ओरियन के फ्लाईव्हील (flywheel) एक्सरसाइज डिवाइस को सेट करेंगे और कसरत शुरू करेंगे। इसके बाद क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन अपनी बारी पर कसरत करेंगे। सुबह की यह मेहनत पृथ्वी की कक्षा छोड़ने से पहले ओरियन के लाइफ सपोर्ट सिस्टम का एक बड़ा परीक्षण भी होगी।
इस दिन का सबसे बड़ा पल ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न’ (TLI) होगा। कोच इसकी पूरी तैयारी करेंगी। यह मिशन की आखिरी बड़ी इंजन फायरिंग है, जो स्पेसक्राफ्ट को सीधे चाँद के रास्ते पर धकेल देगी। यह ताकत यूरोपियन सर्विस मॉड्यूल पर लगे ऑर्बिटल मैन्यूवरिंग सिस्टम इंजन से मिलेगी।
यह इंजन लगभग 6,000 पाउंड तक का थ्रस्ट पैदा करता है, जो स्पेसक्राफ्ट को चाँद की दिशा में भेजने के लिए पर्याप्त है। इसी धक्के से ओरियन 10वें दिन पृथ्वी पर लौटने की ट्रैजेक्टरी में आ जाएगा। इसके बाद अंतरिक्ष यात्री धरती पर वीडियो कॉल करेंगे, जो सातवें और लैंडिंग के दिन को छोड़कर रोज़ाना होगी।
उड़ान का तीसरा और चौथा दिन: रिहर्सल और मेडिकल टेस्ट
तीसरे दिन ‘आउटबाउंड ट्रैजेक्टरी करेक्शन’ नाम की पहली छोटी इंजन फायरिंग होगी। हैनसेन सुबह इसकी तैयारी करेंगे और यह बर्न दोपहर के खाने के बाद होगा। इससे स्पेसक्राफ्ट चाँद के रास्ते पर सही बना रहेगा। इसके बाद ग्लोवर, कोच और हैनसेन अंतरिक्ष में सीपीआर (CPR) देने का अभ्यास करेंगे।
वाइसमैन और ग्लोवर ओरियन के मेडिकल किट की जांच करेंगे। इसमें थर्मामीटर, ब्लड प्रेशर मॉनिटर, स्टेथोस्कोप और कान की जांच करने वाला ओटोस्कोप शामिल है। कोच डीप स्पेस नेटवर्क पर आपातकालीन संचार सिस्टम का टेस्ट करेंगी। पूरी टीम मिलकर छठे दिन के वैज्ञानिक अवलोकन कार्यों की कोरियोग्राफी की रिहर्सल करेगी।
चौथे दिन एक और इंजन फायरिंग होगी। हर सदस्य एक घंटा उन जगहों की जानकारी पढ़ने में लगाएगा जिनकी तस्वीरें उन्हें छठे दिन लेनी हैं। ये जगहें लॉन्च के सही दिन और समय के अनुसार बदल सकती हैं। इसके अलावा 20 मिनट का समय खास तौर पर खगोलीय पिंडों की तस्वीरें लेने के लिए तय किया गया है।
उड़ान का पांचवां दिन: नए स्पेससूट का कड़ा इम्तिहान
पांचवें दिन ओरियन चाँद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर जाएगा। सुबह का समय ‘ओरियन क्रू सर्वाइवल सिस्टम’ वाले नारंगी सूट के परीक्षण का होगा। ये सूट लॉन्च और वापसी के दौरान टीम की रक्षा करते हैं। आपात स्थिति में ये सूट छह दिन तक सांस लेने लायक हवा भी दे सकते हैं।
आर्टेमिस 2 टीम अंतरिक्ष में इन नए सूटों को पहनने वाली पहली टीम है। वे इन्हें तेज़ी से पहनने और दबाव बनाने (pressurize) का अभ्यास करेंगे। वे सूट पहनते हुए अपनी सीटें लगाने और उनमें बैठने की प्रैक्टिस भी करेंगे। हेलमेट के पोर्ट के ज़रिए खाने-पीने का टेस्ट भी होगा। दोपहर में चाँद के करीब से गुज़रने से पहले आखिरी आउटबाउंड ट्रैजेक्टरी करेक्शन बर्न होगा।
उड़ान का छठा और सातवाँ दिन: चाँद का नज़ारा और छुट्टी
छठा दिन मिशन का सबसे बड़ा पल है। ओरियन चाँद के सबसे करीब पहुंचेगा। यही वह लम्हा है जिसके लिए पिछले तीन दिनों से तैयारी चल रही थी।
लगातार काम के बाद सातवाँ दिन पूरी तरह ‘ऑफ-ड्यूटी’ रहेगा। इस दिन टीम कोई निर्धारित काम नहीं करेगी और अंतरिक्ष में सिर्फ आराम करेगी।
उड़ान का आठवाँ और नौवां दिन: वापसी की तैयारी
आठवें दिन ओरियन ‘टेल-टू-सन’ पोज़िशन में मूव करेगा। टीम स्पेसक्राफ्ट के दो अलग-अलग एटीट्यूड कंट्रोल मोड्स (सिक्स-डिग्री-ऑफ-फ्रीडम और थ्री-डिग्री-ऑफ-फ्रीडम) की तुलना करके देखेगी।
नौवें दिन घर लौटने की तैयारी शुरू होगी। टीम समुद्र में उतरने की प्रक्रियाओं का अध्ययन करेगी और फ्लाइट कंट्रोल टीम से बात करेगी। एक और इंजन फायरिंग होगी जिससे वापसी का रास्ता ट्रैक पर रहेगा। टीम यह भी जांचेगी कि अगर ओरियन का टॉयलेट काम न करे तो वेस्ट कलेक्शन सिस्टम कैसे इस्तेमाल होगा।
पृथ्वी पर लौटने और खड़े होने पर चक्कर आने या सिर हल्का महसूस होने की समस्या हो सकती है। इसे ऑर्थोस्टैटिक इनटॉलरेंस कहते हैं। इससे बचने के लिए अंतरिक्ष यात्री ‘कम्प्रेशन गारमेंट्स’ पहनकर देखेंगे। वे शरीर का माप लेंगे और एक सवालनामा भरेंगे कि कपड़े पहनने और उतारने में कितने आसान हैं।
उड़ान का दसवाँ दिन: हीट शील्ड से प्रशांत महासागर तक
दसवाँ दिन टीम को सही-सलामत घर लाने का है। एक अंतिम इंजन फायरिंग ओरियन को प्रशांत महासागर में सही लैंडिंग ज़ोन पर लाएगी। टीम केबिन को उसकी मूल स्थिति में लाएगी। उपकरण अपनी जगह रखे जाएंगे, सीटें लगाई जाएंगी और सभी अपने स्पेससूट पहन लेंगे।
क्रू मॉड्यूल अपने सर्विस मॉड्यूल से अलग हो जाएगा। इसी सर्विस मॉड्यूल के इंजनों ने उन्हें चाँद के चारों तरफ और वापस पृथ्वी तक पहुंचाया है। वायुमंडल में प्रवेश करते समय हीट शील्ड यान को लगभग 3,000 डिग्री फ़ारेनहाइट के तापमान से बचाएगी।
सुरक्षित गुज़रने के बाद स्पेसक्राफ्ट के अगले हिस्से का कवर हटेगा और पैराशूट की श्रृंखला खुलनी शुरू होगी। दो ‘ड्रोग’ पैराशूट गति को 307 मील प्रति घंटे तक कम करेंगे। इसके बाद तीन ‘पायलट’ पैराशूट तीन मुख्य पैराशूटों को बाहर खींचेंगे। मुख्य पैराशूट ओरियन की गति को 17 मील प्रति घंटे तक धीमा कर देंगे। प्रशांत महासागर में नासा और अमेरिकी नौसेना की टीम उनके उतरते ही मिशन का समापन करेगी।
Source: NASA Artemis II mission planning documents

