माइक्रोसॉफ्ट प्रोजेक्ट सिलिका: 10,000 साल तक सुरक्षित रहने वाला ग्लास डेटा स्टोरेज

Microsoft Project Silica team member holding a coaster-sized square fused silica glass platter used for 4.8 TB long-term archival data storage.
प्रोजेक्ट सिलिका का 2 मिलीमीटर पतला फ्यूज्ड सिलिका ग्लास प्लेटर, जिसमें 4.8 TB डेटा हज़ारों सालों तक सुरक्षित रह सकता है। ( Image credit: Microsoft)

आपके कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव ज़्यादा से ज़्यादा पांच साल चलती है। अगर आप बहुत खुशकिस्मत हैं, तो मैग्नेटिक टेप दस साल तक आपका डेटा सुरक्षित रख सकता है। इसके बाद आपका सारा ज़रूरी डेटा हमेशा के लिए मिटने के कगार पर पहुंच जाता है।

माइक्रोसॉफ्ट के ‘प्रोजेक्ट सिलिका’ के डिस्टिंगुइश्ड इंजीनियर एंट रोस्ट्रॉन ने कंपनी के ब्लॉग पर इस समस्या को सीधे शब्दों में रखा है।

रोस्ट्रॉन का स्पष्ट कहना है: “मैग्नेटिक तकनीक का जीवनकाल सीमित होता है। एक हार्ड डिस्क ड्राइव पांच साल चल सकती है, और एक टेप शायद दस साल। लेकिन वह समय पूरा होने के बाद आपको डेटा नई जगह कॉपी करना ही पड़ता है।” उन्होंने आगे बताया कि इसमें जो ऊर्जा और संसाधन लगते हैं, उस हिसाब से यह तरीका बिल्कुल भी सस्टेनेबल नहीं है।

यहीं प्रोजेक्ट सिलिका काम आती है। फरवरी 2026 में ‘Nature’ जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च ने कांच में डेटा स्टोर करने की एक नई और व्यावहारिक तकनीक प्रदर्शित की है। Microsoft Research की टीम ने कांच के एक छोटे से टुकड़े में 4.8 TB (टेराबाइट) डेटा स्टोर करने का सफल परीक्षण किया है।

8,75,000 कॉपियों का डेटा एक छोटे से ‘कोस्टर’ में

प्रोजेक्ट सिलिका की टीम ने 120 मिलीमीटर चौड़े और सिर्फ 2 मिलीमीटर पतले कांच के टुकड़े (प्लैटर) का इस्तेमाल किया है। यह आकार में चाय के कप के नीचे रखे जाने वाले ‘कोस्टर’ जितना है।

माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, इस एक छोटे से कांच में बेहद लंबे उपन्यासों में से एक ‘वॉर एंड पीस’ का टेक्स्ट लगभग 8,75,000 बार समा सकता है। वीडियो के संदर्भ में समझें, तो इसमें करीब 3,500 फिल्में रखी जा सकती हैं।

इसे मुमकिन बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने ‘फेमटोसेकंड लेज़र’ का इस्तेमाल किया है। यह लेज़र कांच के अंदर 3D पिक्सल बनाती है, जिन्हें वॉक्सेल (voxels) कहा जाता है।

डेटा इन्हीं वॉक्सेल्स के रूप में कांच की सैकड़ों परतों में लिखा जाता है।

महंगी सिलिका से लेकर किचन वाले कांच तक का सफ़र

इस पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिकों ने डेटा लिखने के दो अलग-अलग तरीके विकसित किए हैं।

यह वह रिसर्च-ग्रेड ‘राइटर’ (Writer) मशीन है, जिसने कांच के अंदर सबसे तेज़ रफ़्तार से डेटा लिखने का नया रिकॉर्ड बनाया है। Image credit: Microsoft

पहला तरीका ‘बाइरिफ्रिंजेंट वॉक्सेल’ (birefringent voxels) का है, जो फ्यूज्ड सिलिका कांच में इस्तेमाल होता है इसमें प्रकाश के पोलराइज़ेशन को बदला जाता है रिसर्चर्स ने ‘स्यूडो-सिंगल-पल्स’ नाम की एक नई तकनीक खोजी है, जिसमें एक ही लेज़र पल्स को दो हिस्सों में बांटकर काम किया जाता है।

इस तकनीक की मदद से कांच की 301 परतों में 1.59 Gbit प्रति क्यूबिक मिलीमीटर के घनत्व के साथ 4.8 TB डेटा सफलतापूर्वक लिखा जा सका।

दूसरा और सबसे नया तरीका ‘फेज़ वॉक्सेल’ (phase voxels) है। यही वह तकनीक है जिसने सस्ते बोरोसिलिकेट कांच में डेटा लिखना मुमकिन बनाया है। बोरोसिलिकेट वही कांच है जिसका इस्तेमाल हमारे घरों में माइक्रोवेव के बर्तन या ओवन के दरवाज़े बनाने में होता है।

इस तकनीक में वॉक्सेल बनाने के लिए लेज़र की सिर्फ एक पल्स की ज़रूरत होती है। इस तरीके से 258 परतों में 0.678 Gbit प्रति क्यूबिक मिलीमीटर के घनत्व के साथ 2.02 TB डेटा स्टोर किया गया।

65.9 Mbit प्रति सेकंड की रफ़्तार और मशीन लर्निंग

डेटा लिखने की स्पीड को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक ‘मल्टी-बीम’ सिस्टम बनाया है। इसमें लेज़र को चार अलग-अलग बीम में बांटकर एक साथ डेटा लिखा जाता है।

राइटर मशीन के ऑप्टिकल हिस्सों का क्लोज़-अप, जो लेज़र पल्स को अलग-अलग बीम में बांटकर एक साथ तेज़ी से डेटा एनकोड करता है। Image credit: Microsoft

कांच को नुकसान पहुंचाए बिना, रिसर्च टीम ने इस 4-बीम सिस्टम के साथ 65.9 Mbit प्रति सेकंड की थ्रूपुट हासिल की है।

डेटा पढ़ने के तरीके में भी बड़ा सुधार हुआ है। माइक्रोसॉफ्ट के ब्लॉग के अनुसार, पुरानी तकनीक में कांच को पढ़ने के लिए तीन या चार कैमरों की ज़रूरत पड़ती थी।

Nature‘ रिसर्च स्पष्ट करती है कि नई ‘फेज़ वॉक्सेल’ तकनीक को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि रीडर के लिए केवल एक कैमरे की आवश्यकता होती है। (बाइरिफ्रिंजेंट वॉक्सेल का सिस्टम अलग तरीके से काम करता है और इसके लिए खास सेटअप की ज़रूरत होती है)।

डेटा पढ़ने के लिए माइक्रोस्कोप कांच की अलग-अलग गहराई से तस्वीरें लेता है और उन्हें Convolutional Neural Network (CNN) मशीन लर्निंग मॉडल के पास भेजता है।

यहाँ CNN सीधे फाइनल डेटा नहीं निकालता, बल्कि वह केवल यह संभावना तय करता है कि कौन सा सिंबल लिखा गया है। इसके बाद LDPC कोड नाम का एक एल्गोरिदम बची हुई गलतियों को सुधार कर असली डेटा रिकवर करता है।

10,000 साल की उम्र: आग और समय की परीक्षा

इस कांच की उम्र साबित करने के लिए वैज्ञानिकों ने ‘एक्सीलेरेटेड एजिंग’ परीक्षण किए। उन्होंने कांच को अत्यधिक तापमान (440°C से 500°C) पर भट्टी में घंटों तक पकाया।

इसके बाद ‘आर्हेनियस लॉ’ का इस्तेमाल करके डेटा के मिटने की दर मापी गई। परिणाम बताते हैं कि 290°C पर भी डेटा 10,000 साल तक सुरक्षित रह सकता है।

हालांकि, ‘Nature’ की रिपोर्ट एक बहुत ही महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य स्पष्ट करती है। यह आंकड़ा सिर्फ थर्मल स्टेबिलिटी (गर्मी सहने की क्षमता) का परीक्षण है। इसमें बाहरी प्रभावों जैसे मैकेनिकल स्ट्रेस (टूटना या भारी दबाव) या केमिकल जंग का असर शामिल नहीं किया गया है।

एक बार लिख दिया, तो हमेशा के लिए सुरक्षित

एक बार जब डेटा इस कांच में लिख दिया जाता है, तो उसे मिटाया या एडिट नहीं किया जा सकता।

प्रोजेक्ट सिलिका के रिसर्च डायरेक्टर रिचर्ड ब्लैक ने माइक्रोसॉफ्ट ब्लॉग पर स्पष्ट किया कि यह तकनीक उन्हें इस भरोसे के साथ डेटा लिखने की अनुमति देती है कि वह सुरक्षित और अपरिवर्तित रहेगा। ब्लैक के मुताबिक, एक बार कांच को लिखकर लाइब्रेरी में रख दिया जाए, तो यह सिस्टम पूरी तरह ‘इम्यूटेबल’ (बदला न जा सकने वाला) हो जाता है।

फिलहाल यह तकनीक आम यूज़र्स के लिए नहीं, बल्कि बड़े क्लाउड डेटा सेंटर्स के लिए तैयार की जा रही है।

एलायर (Elire) नाम का समूह नॉर्वे के स्वालबार्ड में ‘ग्लोबल म्यूजिक वॉल्ट’ बना रहा है। वे दुनिया भर की महत्वपूर्ण संगीत विरासतों को इसी प्रोजेक्ट सिलिका ग्लास तकनीक का उपयोग करके सहेज रहे हैं, ताकि आने वाले हज़ारों सालों तक इंसानी इतिहास और कला को सुरक्षित रखा जा सके।

By Muhammad Sultan

मैं मुहम्मद सुल्तान हूँ, एक पैशनेट न्यूज़ राइटर। 'Global Update Today' के ज़रिए मेरी कोशिश रहती है कि दुनिया के हर कोने से साइंस, स्पेस और करंट अफेयर्स की वो ख़बरें आप तक लाऊँ, जो आपके लिए जानना ज़रूरी हैं। मेरी लिखी ख़बरों में आपको हमेशा डीप रिसर्च और आसान भाषा मिलेगी।

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