बुध. अप्रैल 8th, 2026

500 MWe का नया रिएक्टर: क्या खत्म होगी भारत की ऊर्जा चिंता?

कल्पक्कम स्थित 500 MWe प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है, जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक कदम है।

6 अप्रैल 2026 को रात 8:25 बजे तमिलनाडु के कल्पक्कम में भारत के वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया। भारत के 500 मेगावाट (MWe) क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने सफलतापूर्वक अपनी पहली ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल कर ली है।

विज्ञान की दुनिया में इसका सीधा मतलब है कि रिएक्टर के भीतर एक नियंत्रित न्यूक्लियर चेन रिएक्शन (controlled fission chain reaction) शुरू हो चुका है। यह भारत की लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा को पक्का करने और स्वदेशी परमाणु तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

पर्दे के पीछे का संघर्ष और कड़ी जांच

इस परियोजना पर काम कई वर्षों से चल रहा था। कई तकनीकी और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों के बाद यह रिएक्टर अब अपने पहले परीक्षण तक पहुंचा है।

इस कामयाबी के समय कंट्रोल रूम में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव और AEC के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती मौजूद थे। उनके साथ IGCAR के निदेशक श्री श्रीकुमार जी. पिल्लई, भाविनी (BHAVINI) के वर्तमान अधिकारी श्री अल्लू अनंत और पूर्व अधिकारी श्री के.वी. सुरेश कुमार भी इस पल के गवाह बने।

इस रिएक्टर को चालू करने की इजाजत एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) से मिली है। बोर्ड ने प्लांट के सभी सुरक्षा सिस्टम्स की गहराई और सख्ती से जांच करने के बाद ही अपनी फाइनल मंजूरी दी थी।

ईंधन बनाने की अनूठी तकनीक

इस रिएक्टर का पूरा डिजाइन इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च (IGCAR) ने स्वदेशी रूप से तैयार किया है। इसे जमीन पर उतारने और कमीशन करने का काम भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) ने किया है।

दुनिया भर में चलने वाले आम थर्मल रिएक्टरों के उलट, यह नया PFBR यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन का इस्तेमाल करता है। इसके काम करने का तरीका सीधा है, पर असर गहरा है।

इसके मुख्य कोर (core) के चारो तरफ यूरेनियम-238 का एक खास आवरण (blanket) लगाया गया है। जब रिएक्टर चलता है, तो फास्ट न्यूट्रॉन इस यूरेनियम-238 से टकराकर उसे प्लूटोनियम-239 में बदल देते हैं। आसान भाषा में, यह रिएक्टर जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा नया ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है।

थोरियम का भविष्य और हमारा मास्टरप्लान

इस रिएक्टर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि आगे चलकर इसके ब्लैंकेट में थोरियम-232 का इस्तेमाल किया जा सके। वैज्ञानिक प्रक्रिया (transmutation) के जरिए यह थोरियम-232 धीरे-धीरे यूरेनियम-233 में बदल जाएगा।

यही यूरेनियम-233 भारत के तीन-चरण वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे हिस्से को चलाने के लिए मुख्य ईंधन बनेगा। यह क्षमता हमारे पास मौजूद सीमित यूरेनियम भंडार का सबसे बेहतरीन इस्तेमाल पक्का करती है।

फास्ट ब्रीडर तकनीक हमारे आज के ‘प्रेसराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टरों’ और भविष्य के ‘थोरियम-आधारित रिएक्टरों’ के बीच एक मजबूत पुल का काम करती है। इससे देश भविष्य में थोरियम के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए तैयार हो रहा है।

वैज्ञानिकों की दशकों की मेहनत

इस रिएक्टर में एडवांस सेफ्टी सिस्टम और हाई-टेम्परेचर लिक्विड सोडियम कूलेंट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें ‘क्लोज्ड फ्यूल साइकिल’ अप्रोच अपनाया गया है, जिससे परमाणु सामग्री को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा और रेडियोएक्टिव कचरा कम होगा।

यह विशाल प्रोजेक्ट उन तमाम वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और इंडस्ट्री पार्टनर्स की सालों की मेहनत का नतीजा है, जिन्होंने स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल कर इसे मुमकिन बनाया। इससे परमाणु ईंधन चक्र, एडवांस सामग्री और बड़े स्तर की इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ रही है।

पहली क्रिटिकैलिटी के बाद अब अगला चरण रिएक्टर को धीरे-धीरे पूरी क्षमता तक ले जाने का है। अगर यह चरण सफल रहता है, तो PFBR देश की स्थिर और कम-कार्बन बिजली आपूर्ति में अहम भूमिका निभा सकता है।


By Muhammad Sultan

मैं मुहम्मद सुल्तान हूँ, एक पैशनेट न्यूज़ राइटर। 'Global Update Today' के ज़रिए मेरी कोशिश रहती है कि दुनिया के हर कोने से साइंस, स्पेस और करंट अफेयर्स की वो ख़बरें आप तक लाऊँ, जो आपके लिए जानना ज़रूरी हैं। मेरी लिखी ख़बरों में आपको हमेशा डीप रिसर्च और आसान भाषा मिलेगी।

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