बिहार में 60km/h की आंधी: 12 जिलों में ओलावृष्टि का बड़ा अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र पटना ने 8 अप्रैल को बिहार के 12 जिलों में ओलावृष्टि और तेज आंधी की चेतावनी जारी की है। (Photo Illustration/ Global Update Today)

अप्रैल की धूप में खेत संभाल रहे किसानों के लिए आसमान का रंग बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने 6 अप्रैल 2026 की रात 8:30 बजे बिहार के लिए अगले सात दिनों की मौसम चेतावनी जारी की है। सबसे ज्यादा चौकन्ना रहने वाला दिन 8 अप्रैल बताया गया है।

भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत काम करने वाले इस केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान अगले 3 से 4 दिनों में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा। तापमान गिरने के साथ-साथ तेज़ आंधी और ओलावृष्टि का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

आसमान में पांच मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय

इस वक्त देश के ऊपर पांच अलग-अलग मौसम प्रणालियां एक साथ काम कर रही हैं। जम्मू-कश्मीर और उसके आसपास 3.1 से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ मौजूद है।

दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश से लेकर पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर हवाओं का एक ऊपरी-वायु चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश से पूर्वी मध्य प्रदेश होते हुए पूर्वी विदर्भ तक एक द्रोणिका (trough line) भी गुजर रही है।

ओडिशा के आसमान में 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक और चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है । इन सबसे ऊपर, पूर्वी भारत में 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम 110 नॉट्स (करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे) की तेज़ रफ्तार से चल रही है। 11 अप्रैल 2026 से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी भारत में दस्तक देने वाला है।

8 अप्रैल सबसे संवेदनशील — इन 12 जिलों में गिरेंगे ओले

मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार 8 अप्रैल का दिन सबसे ज्यादा खतरनाक है। इस दिन अररिया, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, किशनगंज, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, समस्तीपुर, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल और पश्चिमी चंपारण जिलों में ओलावृष्टि की सीधी चेतावनी है।

इन 12 जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी हवाएं चलेंगी और वज्रपात की भी आशंका है। इसी दिन दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-मध्य और दक्षिण-पूर्व बिहार के जिलों — गोपालगंज, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा, सारण, सीवान और वैशाली में भी 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं और वज्रपात होने का अनुमान है।

इससे पहले 6 अप्रैल को उत्तर-मध्य, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व भागों में 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा चलने का अनुमान जताया गया है। 7 अप्रैल को राज्य के अधिकांश हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा और वज्रपात की चेतावनी है। 9 अप्रैल को हवा की गति 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे रह जाएगी। 10, 11 और 12 अप्रैल को राज्य में मौसम साफ रहेगा और कोई चेतावनी नहीं है।

तापमान कितना गिरेगा — जिलेवार अनुमान

इस मौसमी हलचल का सीधा असर राज्य के तापमान पर पड़ेगा। उत्तर-पश्चिम बिहार के पश्चिम चंपारण, सीवान, सारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज में 6 अप्रैल को अधिकतम तापमान 34-36°C है। 9 अप्रैल तक यह 24-26°C पर आ जाएगा। यहां रात का तापमान भी 20-22°C से गिरकर 16-18°C तक पहुंचेगा।

उत्तर-मध्य बिहार (सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा आदि) और उत्तर-पूर्व बिहार (सुपौल, पूर्णिया, कटिहार आदि) में भी 6 अप्रैल के 34-36°C तापमान से गिरकर 9 अप्रैल को 24-26°C तक आने की संभावना है।

दक्षिण-मध्य बिहार के पटना, गया, नालंदा, नवादा और बेगूसराय में अधिकतम तापमान 32-34°C से गिरकर 9 अप्रैल को 24-26°C हो जाएगा। बक्सर, भोजपुर और रोहतास जैसे दक्षिण-पश्चिमी जिलों में 9 अप्रैल को न्यूनतम तापमान 14-16°C तक जा सकता है। 10 अप्रैल से तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा।

रंगों और आंकड़ों में समझें अलर्ट की गंभीरता

मौसम विभाग अलग-अलग रंगों के जरिए खतरे की गंभीरता बताता है। लाल रंग (Red Warning) का मतलब है — तुरंत बचाव के उपाय करें। नारंगी रंग (Orange Alert) बताता है कि आने वाले खतरे के लिए तैयार रहें। पीला रंग (Yellow Watch) निगरानी रखने और अपडेट रहने का संकेत है। हरा रंग (Green) का मतलब है कोई चेतावनी नहीं।

बारिश की मात्रा भी तय श्रेणियों में बंटी है। जब 25% से कम स्थानों पर 2.4 मिलीमीटर तक बारिश होती है, तो उसे ‘बहुत हल्की या नाम मात्र की वर्षा’ कहा जाता है। 64.5 से 115.5 मिलीमीटर की बारिश को ‘भारी वर्षा’ माना जाता है। 204.5 मिलीमीटर से ज़्यादा होने पर ‘अत्यंत भारी वर्षा’ घोषित की जाती है।

मौसम विभाग की सीधी सलाह — जान और माल कैसे बचाएं

इस तेज़ आंधी और ओलावृष्टि को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क और सावधान रहने की अपील की है। ओलावृष्टि से लोगों और पशुओं को सीधे चोट लग सकती है।

विभाग ने साफ कहा है कि अगर आप खुले में हैं तो शीघ्रताशीघ्र किसी पक्के मकान की शरण लें । ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों और विद्युत सुचालक वस्तुओं से पूरी तरह दूर रहें।

किसानों को स्पष्ट सलाह दी गई है कि मौसम साफ होने की प्रतीक्षा करें, उसके बाद ही खेत का काम करें। अस्थायी और असुरक्षित संरचनाएं — टिन की छतें या कच्चे मकान — पहले से सुरक्षित करें या खाली कर दें। घर के बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें।

यह मौसम पूर्वानुमान ड्यूटी ऑफिसर श्री राजमणि कुमार, Met-A द्वारा संकलित और मौसम वैज्ञानिक-डी डॉ. आनंद शंकर द्वारा जारी किया गया है। स्रोत: मौसम विज्ञान केंद्र, अनिसाबाद, पटना — भारत मौसम विज्ञान विभाग।

By Muhammad Sultan

मैं मुहम्मद सुल्तान हूँ, एक पैशनेट न्यूज़ राइटर। 'Global Update Today' के ज़रिए मेरी कोशिश रहती है कि दुनिया के हर कोने से साइंस, स्पेस और करंट अफेयर्स की वो ख़बरें आप तक लाऊँ, जो आपके लिए जानना ज़रूरी हैं। मेरी लिखी ख़बरों में आपको हमेशा डीप रिसर्च और आसान भाषा मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *