उत्तर बंगाल में बाढ़ जैसे हालात के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिससे तमिलनाडु के कई ज़िलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी को जोड़ने वाला रास्ता अब सिर्फ पानी का एक उफनता हुआ बहाव है। यहाँ का पुराना दुधिया पुल नदी के तेज़ बहाव में पूरी तरह बह गया है। यह घटना इस साल के मानसून की ताक़त का पहला सीधा नज़ारा है।
‘द हिंदू’ की 20 जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर बंगाल में बारिश के साथ-साथ अब दक्षिण-पश्चिम मानसून भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिसका असर दक्षिणी राज्यों में दिखने लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताज़ा बुलेटिन में इसकी पुष्टि की है।
आईएमडी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई स्थित कलासपक्कम में सबसे अधिक 9 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट का अनुमान है।
तमिलनाडु के किन ज़िलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है?
आईएमडी ने नीलगिरी, इरोड, सलेम, धर्मपुरी, कृष्णागिरी, कोयंबटूर, थेनी, डिंडीगुल और कन्याकुमारी ज़िलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अलावा, तिरुनेलवेली ज़िले के पश्चिमी घाट क्षेत्रों में भी तेज़ हवाओं के साथ लगातार बारिश होने की संभावना है।
मौसम प्रणाली में बदलाव
मौसम प्रणाली में यह बदलाव ऊपरी हवा के चक्रवात और एक विशेष ‘ट्रफ’ क्षेत्र के लगातार बने रहने के कारण हो रहा है। इसके प्रभाव से हवा समुद्र से नमी खींचती है, जो पश्चिमी घाट से टकराकर घने बादलों में बदल जाती है।
भौगोलिक रूप से देखा जाए तो, उत्तर बंगाल और दक्षिण भारत में मौसम की यह स्थिति दो अलग-अलग प्रणालियों का परिणाम है। बंगाल में भारी बारिश स्थानीय दबाव से जुड़ी है, जबकि तमिलनाडु में यह सीधे तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने का असर है।
दक्षिण भारत के लिए यह बारिश सिर्फ एक मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ी राहत लेकर आई है। लंबे समय से भीषण लू का सामना कर रहे तटीय शहरों के निवासियों को इस गिरते तापमान से काफी सुकून मिला है।
मानसून का यह आगे बढ़ना स्थानीय कृषि और जल संसाधनों के लिए भी महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से नीलगिरी और कोयंबटूर जैसे क्षेत्रों में, यह बारिश खरीफ की फसलों और भूजल स्तर को फिर से भरने के लिए बेहद ज़रूरी मानी जाती है।
प्रशासन की ज़मीनी प्रतिक्रिया
उत्तर बंगाल के हालात पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ज़मीनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “नदियों का जलस्तर फिलहाल नियंत्रण से बाहर है और टूटे हुए रास्तों की कनेक्टिविटी बहाल करने में कम से कम 4-5 दिन का समय लगेगा।”
समुद्र तटीय इलाकों में सुरक्षा के लिहाज़ से भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने तमिलनाडु तट और मन्नार की खाड़ी में 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलने वाली तेज़ हवाओं को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है।
आईएमडी के अगले पूर्वानुमान के अनुसार, 23 जून के आसपास मानसून नए क्षेत्रों को कवर करेगा। यह मौसम प्रणाली अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के और अधिक हिस्सों में पहुंचने वाली है।
मुख्य तथ्य
- तिरुवन्नामलाई के कलासपक्कम में 24 घंटे के भीतर सबसे अधिक 9 सेंटीमीटर बारिश।
- तमिलनाडु के 10 से अधिक ज़िलों में 21 जून से भारी बारिश की चेतावनी जारी।
- चेन्नई सहित कई प्रभावित क्षेत्रों के अधिकतम तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की कमी का अनुमान।
- बंगाल में बारिश के कारण दार्जिलिंग का संपर्क मार्ग कटा, मरम्मत में 4-5 दिन का समय लगेगा।
- 23 जून तक मानसून के महाराष्ट्र, बिहार और ओडिशा में पहुंचने की आधिकारिक संभावना।

