दक्षिण सूडान की 56 प्रतिशत आबादी तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है, जिसमें 22 लाख बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं।
दक्षिण सूडान में 78 लाख लोग — यानी देश की आधी से ज़्यादा आबादी — इस वक्त खाने के गंभीर संकट में हैं। इनमें 22 लाख वो बच्चे हैं जो छह महीने से पांच साल के हैं।
खाद्य और कृषि संगठन (FAO), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और यूनिसेफ ने 28 अप्रैल 2026 को यह साझा रिपोर्ट प्रकाशित की है। IPC (इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज़ क्लासिफिकेशन) के नए विश्लेषण ने अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच इस संकट के और गहराने की चेतावनी दी है।
IPC रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में यह वर्तमान में तीव्र खाद्य असुरक्षा के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है। मूल स्रोत के आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल 56 प्रतिशत आबादी इस वक्त भोजन की भारी कमी का सामना कर रही है।
कुल प्रभावित लोगों में से 73,300 लोग ‘तबाही’ (Catastrophe / IPC Phase 5) की स्थिति में हैं। यह तीव्र खाद्य असुरक्षा का सबसे गंभीर स्तर है। इसमें पिछले अनुमान की तुलना में 160 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
अध्ययन में पाया गया कि 25 लाख लोग ‘आपातकाल’ (Emergency / IPC Phase 4) श्रेणी में हैं। इसके अतिरिक्त 53 लाख लोग ‘संकट’ (Crisis / IPC Phase 3) श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।
विस्थापन और बीमारियों का प्रहार
जोंगलेई राज्य में, जहां लगभग 3 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। इन बेघर हुए परिवारों का मानवीय सहायता से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। बाज़ारों या राशन तक उनकी कोई पहुंच नहीं बची है।
भोजन की बढ़ती कीमतों, कमज़ोर घरेलू क्रय शक्ति और लगातार हो रहे संघर्ष ने परिवारों को तोड़ दिया है। इसके साथ ही बाढ़ और कमज़ोर कृषि उत्पादन ने देश में भोजन की उपलब्धता को काफी कम कर दिया है।
संघर्ष के कारण कई स्वास्थ्य और पोषण सुविधाएं या तो क्षतिग्रस्त हो गई हैं या बंद पड़ी हैं। फंड और आवश्यक आपूर्ति की कमी के कारण जीवन रक्षक उपचार तक लोगों की पहुंच घटी है।
इस कमज़ोर स्वास्थ्य ढांचे का सीधा असर कुपोषित बच्चों पर पड़ रहा है। इन कमज़ोर बच्चों में हैजा, मलेरिया और खसरा जैसी बीमारियों का प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है। यह इस संकट को और जानलेवा बना रहा है।
अकाल की चेतावनी और कुपोषण
एजेंसियों ने अपर नाइल और जोंगलेई राज्यों के चार काउंटियों में अकाल के एक विश्वसनीय जोखिम की चेतावनी दी है। संघर्ष से प्रभावित इन समुदायों का भोजन, बाज़ार और आवश्यक सेवाओं से संपर्क पूरी तरह कट चुका है।
एजेंसियों ने इस खतरे को ‘सबसे बुरी स्थिति’ (worst-case scenario) पर आधारित माना है। यानी, संघर्ष जारी रहे, विस्थापन बढ़े, और मानवीय पहुंच रोकी जाती रहे।
IPC के अनुमान के अनुसार, अपर नाइल, यूनिटी और जोंगलेई राज्यों के 11 काउंटियों में ‘अत्यंत गंभीर’ (Extremely Critical / IPC Acute Malnutrition Phase 5) कुपोषण के परिणाम देखे जा रहे हैं।
कुछ क्षेत्रों में मानवीय सहायता बढ़ाई जा रही है, लेकिन इसकी पहुंच (coverage) अभी भी बहुत असमान है। कई समुदाय अभी भी इतने दुर्गम इलाकों में हैं कि उन्हें कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
बच्चों में पोषण का स्तर तेज़ी से गिर रहा है। पिछले छह महीनों में छह महीने से पांच साल तक के बच्चों में तीव्र कुपोषण के 1 लाख नए मामले सामने आए हैं।
इस साल जुलाई तक 7 लाख बच्चों के गंभीर तीव्र कुपोषण का शिकार होने का अनुमान है। यूनिसेफ के अनुसार, यह कुपोषण का सबसे घातक रूप है।
संकट सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है। देश में 12 लाख गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी तीव्र रूप से कुपोषित हैं। इससे माताओं और शिशुओं दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।
राहत कार्यों में बाधाएं
FAO के आपात स्थिति और लचीलापन कार्यालय के निदेशक रेन पॉलसेन ने कहा: “हम उन उपलब्धियों को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते जो हमने हाल के वर्षों में हासिल की थीं। विशेष रूप से जब दक्षिण सूडान स्थानीय कृषि उत्पादन में सुधार कर रहा था।”
पॉलसेन ने स्पष्ट किया कि कृषि उत्पादन की दिशा में जो भी प्रगति हुई थी, वह मौजूदा संघर्ष और जलवायु झटकों के कारण खतरे में है। उन्होंने आजीविका और खाद्य उत्पादन बचाने के लिए तत्काल सामूहिक कार्रवाई पर ज़ोर दिया।
WFP के आपात स्थिति निदेशक रॉस स्मिथ ने कहा: “हम बारिश के मौसम की शुरुआत से पहले सुदूर इलाकों में आपूर्ति बढ़ाने के लिए समय के खिलाफ एक महत्वपूर्ण दौड़ में शामिल हैं।”
स्मिथ ने बताया कि इस साल की शुरुआत से जोंगलेई और अपर नाइल में संघर्ष बढ़ा है। इससे प्रभावित लोगों तक पहुंचने के प्रयासों में बार-बार रुकावटें आई हैं। उन्होंने आगाह किया कि तत्काल समर्थन के बिना बच्चों का भविष्य खतरे में है।
यूनिसेफ की आपातकाल निदेशक लुसिया एल्मी ने कहा: “हम एक घातक गिरावट देख रहे हैं जहां 22 लाख बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं। उनमें से लगभग 7 लाख बच्चों के मरने का गंभीर खतरा है।”
एल्मी के अनुसार, मानवीय पहुंच और आपूर्ति में देरी का हर एक दिन किसी बच्चे के जीवन को अधर में लटका देता है। उन्होंने सभी पक्षों से संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में समय पर और सुरक्षित पहुंच देने का आग्रह किया।
यह विश्लेषण IPC के स्वतंत्र डेटा पर आधारित है। चूँकि यह तीन प्रमुख एजेंसियों की साझा रिपोर्ट है, इसलिए इस स्रोत में किसी बाहरी स्वतंत्र विशेषज्ञ की टिप्पणी शामिल नहीं है। (भविष्य की रिपोर्ट्स में FEWS NET जैसे स्वतंत्र विश्लेषकों के आकलन को भी जोड़ा जा सकता है।)
पोषण और WASH (वाटर, सैनिटेशन एंड हाइजीन) क्लस्टर के साथ मिलकर FAO, WFP और यूनिसेफ ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और सरकारों से तुरंत कार्रवाई करने का आह्वान किया है।
एजेंसियों ने साफ चेतावनी दी है। अगर तत्काल बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह संकट पलटाया नहीं जा सकेगा। सुदूर इलाकों तक रसद पहुंचाना अब सबसे ज़रूरी प्राथमिकता है।
मुख्य तथ्य
- देश की 56 प्रतिशत (78 लाख) आबादी तीव्र खाद्य असुरक्षा में है।
- ‘तबाही’ (Catastrophe / Phase 5) श्रेणी के मामलों में 160% की वृद्धि हुई है।
- 6 महीने से 5 साल के 22 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण का शिकार हैं।
- 12 लाख गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं कुपोषित हैं।
- जोंगलेई राज्य में लगभग 3 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।

