यूरोप में 38,000 समुद्री पक्षी मृत: अटलांटिक तूफानों ने भोजन-श्रृंखला तोड़ी, एक दशक की सबसे बड़ी तबाही

फरवरी 2026 की शुरुआत से यूरोप के अटलांटिक तट पर 38,000 से अधिक समुद्री पक्षी मृत या अत्यंत कमज़ोर अवस्था में पाए गए हैं। पुर्तगाल के दक्षिणी तट से लेकर स्कॉटलैंड के उत्तरी किनारों तक फैली यह घटना पिछले एक दशक की सबसे बड़ी “सीबर्ड रेक” मानी जा रही है।

तूफानों ने छीना पक्षियों का शिकार

शोधकर्ताओं के अनुसार इन मौतों का प्रमुख कारण स्टॉर्म गोरेटी, स्टॉर्म इंग्रिड और स्टॉर्म चंद्रा हैं, जो इस सर्दी अटलांटिक महासागर में एक के बाद एक आए। इन तूफानों ने समुद्र की सतह को इतना अशांत कर दिया कि पफिन जैसे पक्षी — जो मछली को पानी के अंदर देखकर शिकार करते हैं — अपना भोजन खोजने में असमर्थ हो गए।

BirdLife International के फील्ड डेटा के अनुसार, मृत पाए गए पक्षियों की हड्डियां बाहर निकली हुई थीं, शरीर में कोई वसा (fat) नहीं बची थी और मांसपेशियां पूरी तरह क्षीण हो चुकी थीं। ये भुखमरी के स्पष्ट चिकित्सीय संकेत हैं, किसी वायरस या बीमारी के नहीं।

देश-दर-देश आंकड़े

फ्रांस में सबसे अधिक प्रभाव देखा गया, जहां LPO France (Ligue pour la Protection des Oiseaux) ने लगभग 32,000 मृत या कमज़ोर पक्षी दर्ज किए। स्पेन में यह संख्या करीब 5,000 और पुर्तगाल में लगभग 1,200 रही।

यूके में, सिर्फ कॉर्नवाल क्षेत्र में फरवरी के अंत तक 300 से अधिक पफिन मृत पाए गए। RSPB (Royal Society for the Protection of Birds) ने पुष्टि की है कि यूके के विभिन्न तटों पर पफिन, गुइलेमोट, रेज़रबिल और टर्न प्रजातियां सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं।

तट पर मिलने वाली लाशें असली संख्या का एक हिस्सा मात्र हैं

RSPB के विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि समुद्र तटों पर मिले पक्षी वास्तविक मृत्यु संख्या का केवल एक छोटा अनुपात दर्शाते हैं। अधिकांश पक्षी खुले समुद्र में मरते हैं और उनके शव कभी किनारे नहीं पहुंचते।

यह पहली बार नहीं है। 2014 में यूरोप में इसी प्रकार की घटना में लगभग 55,000 पक्षी दर्ज किए गए थे और 1983 में ब्रिटिश जलसीमा में करीब 34,000 पक्षी मृत पाए गए थे।

सैंड ईल की कमी: तूफान से पहले की असली समस्या

BirdLife International के विशेषज्ञ इस घटना को केवल मौसमी तूफानों तक सीमित नहीं मानते। पफिन और गुइलेमोट जैसी प्रजातियां मुख्यतः सैंड ईल (sand eel) नामक छोटी मछलियों पर निर्भर हैं। समुद्र के बढ़ते तापमान के कारण सैंड ईल उत्तर की ओर खिसक रही हैं, जिससे इन पक्षियों के पारंपरिक शिकार-क्षेत्र खाली होते जा रहे हैं।

इसके अलावा ओवरफिशिंग, एवियन इन्फ्लुएंजा (2021 से सक्रिय) और समुद्री विकास परियोजनाएं भी इन प्रजातियों पर दीर्घकालिक दबाव बना रही हैं।

आबादी की रिकवरी दशकों की प्रक्रिया

RSPB के अनुसार पफिन और इसी वर्ग के अन्य पक्षी लंबे जीवन जीते हैं लेकिन प्रति वर्ष केवल एक ही बच्चे को जन्म देते हैं। इसका अर्थ यह है कि एक बड़े मृत्यु-प्रकरण के बाद इनकी आबादी को सामान्य स्तर पर लौटने में कई दशक लग सकते हैं।

फिलहाल यूके, फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल के वन्यजीव बचाव केंद्र जीवित लेकिन अत्यंत कमज़ोर पाए गए पक्षियों का उपचार कर रहे हैं।

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