दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक देश, भारत, अब खाद के लिए लगभग दोगुनी कीमत चुका रहा है। ईरान और मध्य पूर्व के तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है। इसके चलते भारत ने एक ही टेंडर में 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया खरीदने का फैसला किया है, जो 2025 में भारत के करीब 1 करोड़ टन के सालाना यूरिया आयात का एक-चौथाई हिस्सा है।
इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) ने यह सौदा पश्चिमी तट के लिए 935 डॉलर (15 लाख टन) और पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन (10 लाख टन) की दर पर तय किया है। यह कीमत इसलिए अहम है क्योंकि दो महीने पहले राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स के टेंडर में यूरिया 508 से 512 डॉलर प्रति टन में मिला था।
इस टेंडर में कुल 56 लाख टन यूरिया आपूर्ति के प्रस्ताव आए थे। अधिकांश बोलियां 1,000 डॉलर के आसपास थीं और कुछ 1,136 डॉलर तक पहुंच गई थीं।
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया: “कई आपूर्तिकर्ता पश्चिमी और पूर्वी तट के शिपमेंट के लिए पेश की गई सबसे कम बोली से मैच करने को तैयार हो गए, जिसके कारण 25 लाख टन की यह पूरी खरीद संभव हो पाई।”
सब्सिडी बिल पर असर और वैश्विक चुनौतियां
टेंडर के दस्तावेजों के अनुसार, 14 जून तक सभी जहाजों को लोड पोर्ट (लोडिंग बंदरगाह) से रवाना होना अनिवार्य है। भारत ने भले ही अपनी आपूर्ति सुरक्षित कर ली है, लेकिन महंगे आयात का सीधा असर फर्टिलाइजर सब्सिडी बिल पर पड़ेगा। सरकार उर्वरक कंपनियों को किसानों को बाजार से कम कीमत पर खाद बेचने के लिए मुआवजा देती है।
भारत द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया खरीदने के बाद अन्य खरीदार देशों के लिए उर्वरक हासिल करना चुनौती होगी। मुंबई के उर्वरक उद्योग के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि भारत को माल देने की प्रतिबद्धता के बाद बड़े उत्पादकों के पास अन्य खरीदारों के लिए सीमित भंडार बचेगा। इसका मतलब यह है कि वैश्विक बाजार में यूरिया की उपलब्धता और कम हो सकती है।

