मंगल. अप्रैल 21st, 2026

वैज्ञानिकों ने खोजी कैंसर कोशिकाओं की नई कमजोरी, विटामिन B7 की भूमिका पर शोध

प्रयोगशाला में कैंसर कोशिकाओं की जांच। (प्रतीकात्मक) नए शोध के अनुसार, विटामिन B7 की अनुपस्थिति में ट्यूमर कोशिकाओं का विकास प्रयोगशाला स्तर पर रोका जा सका। Credit: AI/ globalupdatetoday.com

यूनिवर्सिटी ऑफ लुसाने के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि विटामिन B7 की अनुपस्थिति में कैंसर कोशिकाओं का विकास प्रयोगशाला में रोका जा सकता है। कैंसर के इलाज में ट्यूमर कोशिकाओं की मेटाबॉलिक अनुकूलन क्षमता (Adaptability) अक्सर बड़ी बाधा बनती है। ‘ग्लूटामाइन’ नामक न्यूट्रिएंट पर निर्भर रहने वाली ये कोशिकाएं इसकी कमी होने पर भी बचने का वैकल्पिक रास्ता निकाल लेती हैं।

‘मॉलिक्यूलर सेल’ (Molecular Cell) जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन इसी मेटाबॉलिक बदलाव के तंत्र को समझने में विटामिन B7 (बायोटिन) की भूमिका पर प्रकाश डालता है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह शोध अभी प्रयोगशाला स्तर पर है और मनुष्यों पर इसका परीक्षण होना बाकी है।

ट्यूमर कोशिकाएं जीवित रहने के लिए ‘पाइरूवेट कार्बोक्सिलेज’ नामक एंजाइम का इस्तेमाल करती हैं। जब कोशिकाओं में ग्लूटामाइन कम होता है, तो यह एंजाइम विटामिन B7 की मदद से ऊर्जा बनाता है। इसी लचीलेपन के कारण मुख्य रूप से ग्लूटामाइन को टारगेट करने वाली थेरेपी हमेशा सफल नहीं हो पातीं।

FBXW7 जीन म्यूटेशन का प्रभाव

वैज्ञानिकों ने पाया कि कैंसर से जुड़े FBXW7 जीन में बदलाव होने पर यह पूरी प्रक्रिया बाधित होती है। अध्ययन की प्रथम लेखिका डॉ. मिरियम लिस्सी स्पष्ट करती हैं, “जब FBXW7 म्यूटेट होता है — जो कुछ कैंसरों में आम है — तो पाइरूवेट कार्बोक्सिलेज आंशिक रूप से गायब हो जाता है, पाइरूवेट का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं हो पाता, और कोशिकाएं ग्लूटामाइन पर निर्भर हो जाती हैं।”

इस अध्ययन में नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रो. ओवेन स्किनर की टीम का भी सहयोग रहा। रिसर्च के सीनियर लेखक प्रो. एलेक्सिस जुर्डेन के अनुसार, यह शोध कैंसर की मेटाबॉलिक फ्लेक्सिबिलिटी को समझने और एक साथ कई रास्तों को टारगेट करने वाली नई रणनीतियां बनाने में मदद करेगा।

इस अध्ययन में नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रो. ओवेन स्किनर की टीम का भी सहयोग रहा। रिसर्च के सीनियर लेखक प्रो. एलेक्सिस जुर्डेन के अनुसार, यह शोध कैंसर की मेटाबॉलिक फ्लेक्सिबिलिटी को समझने और एक साथ कई रास्तों को टारगेट करने वाली नई रणनीतियां बनाने में मदद करेगा।

यह शोध ट्यूमर कोशिकाओं की एक अहम मेटाबॉलिक सीमा को रेखांकित करता है। अब वैज्ञानिक जगत के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या लैब के इस निष्कर्ष को भविष्य में इंसानों के लिए एक सुरक्षित और कारगर क्लिनिकल थेरेपी में बदला जा सकेगा?

By Muhammad Sultan

मैं मुहम्मद सुल्तान हूँ, एक पैशनेट न्यूज़ राइटर। 'Global Update Today' के ज़रिए मेरी कोशिश रहती है कि दुनिया के हर कोने से साइंस, स्पेस और करंट अफेयर्स की वो ख़बरें आप तक लाऊँ, जो आपके लिए जानना ज़रूरी हैं। मेरी लिखी ख़बरों में आपको हमेशा डीप रिसर्च और आसान भाषा मिलेगी।

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