खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत की खबर आई है। ईरान ने दो भारतीय एलपीजी टैंकरों को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है, जबकि इस रास्ते से अधिकतर जहाजों की आवाजाही फिलहाल रोकी गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब भारत अपनी घरेलू रसोई गैस की मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
पाबंदियों के बीच नौसेना की सुरक्षा
मामले की जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना की निगरानी में ‘शिवालिक’ नाम का एलपीजी टैंकर इस जलमार्ग को पार कर चुका है। दूसरा टैंकर ‘नंदा देवी’ भी कुछ ही घंटों में इस जलमार्ग को पार करने वाला था। ये दोनों जहाज सरकारी कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं।
अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले अधिकतर जहाजों को रोक दिया है। यही जलडमरूमध्य दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और समुद्री तरल प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई का मुख्य मार्ग माना जाता है। ईरान ने स्पष्ट किया था कि अमेरिका या उसके सहयोगियों के लिए कोई सप्लाई यहाँ से नहीं जाएगी।
कूटनीतिक बातचीत और नाविकों को पनाह
भारत ने इस पाबंदी से छूट की मांग की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बताया कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से ऊर्जा सप्लाई और व्यापारिक शिपमेंट को लेकर बात की है।
इस कूटनीतिक सहमति के पीछे एक बड़ा कारण भारत का सहयोग भी है। भारत ने 183 ईरानी नाविकों को अपने यहाँ सुरक्षित पनाह दी है। ये नाविक उस जहाज पर सवार थे जो युद्ध शुरू होने के बाद भारत में रुक गया था। यह जहाज भारत में सैन्य अभ्यास के लिए आए तीन ईरानी जहाजों में से एक था, जिनमें से एक को अमेरिका ने श्रीलंका के तट के पास टॉरपीडो से डुबा दिया था।
रसोई गैस का बढ़ता संकट
भारत इस समय दशकों के सबसे गंभीर गैस संकट का सामना कर रहा है। हालात इतने दबावपूर्ण हैं कि सरकार घरेलू रसोई गैस की कमी से बचाने के लिए उद्योगों की गैस सप्लाई घटा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल भारत में 33.15 मिलियन टन कुकिंग गैस की खपत हुई थी। इस कुल मांग का 60 प्रतिशत हिस्सा आयात किया जाता है। इसमें से 90 प्रतिशत गैस सीधे मध्य पूर्व से आती है।
जहाजों की लाइव ट्रैकिंग और कच्चे तेल की खेप
जहाजों की लोकेशन से जुड़ी यह जानकारी शिप-ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म MarineTraffic के डेटा पर आधारित है, जो समुद्री जहाजों की वास्तविक समय की स्थिति दिखाता है। इस डेटा के अनुसार, शिवालिक 25 फरवरी को कतर पहुंचा था और 12 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात से 24 मील दूर था। नंदा देवी को शुक्रवार को हॉर्मुज़ के प्रवेश द्वार के पास देखा गया था।
गैस के अलावा, शिपिंग डेटा प्लेटफॉर्म Lloyd’s List Intelligence के अनुसार लाइबेरिया के झंडे वाला ‘स्मिरनी’ सुएज़मैक्स टैंकर लगभग 10 लाख बैरल सऊदी कच्चा तेल लेकर शनिवार तक भारत पहुंच सकता है। यह जहाज हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प (HPCL) के लिए 1 मार्च के आसपास हॉर्मुज़ से निकला था।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत के विदेश मंत्रालय, नौसेना, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प से प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया गया था। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इन संस्थानों की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया था।
आम नागरिकों के लिए इसका अर्थ
इन दो एलपीजी टैंकरों का बाहर आना भारतीय घरों के लिए एक सीधा समाधान है। हालांकि, भारत सरकार के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में अभी भी 24 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। जब तक समुद्री रास्ते पूरी तरह नहीं खुलते, ऊर्जा आयात का यह दबाव पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

