चीन का स्पेस प्रयोग: 14 दिन अंतरिक्ष में रहकर लौटी चूहिया बनी 28 बच्चों की मां

अंतरिक्ष में मानव बस्तियों की सबसे बड़ी चुनौती

अंतरिक्ष में मानव बस्तियां बसाने की सबसे बड़ी वैज्ञानिक चुनौती यही है कि क्या स्पेस के खतरनाक माहौल में स्तनधारी जीव सुरक्षित रूप से प्रजनन कर सकते हैं। चीन के एक स्पेस एक्सपेरिमेंट ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण डेटा पेश किया है।

स्पेस से वापस लौटी एक आम लेबोरेटरी चूहिया ने पूरे 28 बच्चों को जन्म दिया है। यह अंतरिक्ष विज्ञान और भविष्य के डीप स्पेस मिशन्स के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

तियांगोंग मिशन का सच और 28 बच्चों का जन्म

अक्टूबर 2025 में चीन ने ‘शेनझोउ-21’ मिशन के तहत चार चूहों को अपने तियांगोंग स्पेस स्टेशन भेजा था। ये चूहे करीब दो हफ्ते तक माइक्रोग्रैविटी में रहे और 14 नवंबर 2025 को सुरक्षित धरती पर वापस आ गए।

इसके बाद जो हुआ, वह अंतरिक्ष जीव विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण डेटा बन गया। एक मादा चूहिया प्रेग्नेंट हुई और उसने तीन अलग-अलग बार में कुल 28 बच्चों को जन्म दिया।

शेनझोउ-21 प्रयोग का जन्म डेटा: तीन litter, 28 बच्चे

नॉर्मल चूहिया: धरती पर एक आम चूहिया एक बार में सिर्फ पांच से सात बच्चे ही पैदा करती है।

पहली डिलीवरी (10 दिसंबर 2025): स्पेस से लौटी चूहिया ने सबसे पहले नौ बच्चों को जन्म दिया।

दूसरी डिलीवरी: इस बार 10 बिल्कुल स्वस्थ बच्चे पैदा हुए।

तीसरी डिलीवरी (फरवरी 2026): चूहिया ने फिर से नौ बच्चों को जन्म दिया। • कुल आंकड़ा: कुछ ही महीनों में 28 बच्चे, जो आम चूहों के मुकाबले एक असामान्य रूप से बड़ी संख्या है।

बच्चों का अजीब बर्ताव: पीढ़ियों के साथ कम होता असर

बाकी न्यूज़ साइट्स ने सिर्फ संख्या बताई है, लेकिन इस प्रयोग की असली कहानी इन बच्चों के व्यवहार में छिपी है। वैज्ञानिकों ने देखा कि पहली बार पैदा हुए नौ बच्चे चलने-फिरने में काफी डरे और सहमे हुए थे।

लेकिन दूसरी बार पैदा हुए 10 बच्चे अधिक आत्मविश्वास के साथ खोजबीन कर रहे थे। वहीं, तीसरी बार वाले बच्चे बिल्कुल नॉर्मल धरती के चूहों जैसे ही बर्ताव कर रहे थे।

इसका सीधा सा मतलब है कि स्पेस के असर से जो भी अस्थायी जैविक या बिहेवियरल बदलाव आते हैं, वो अगली पीढ़ियों में धीरे-धीरे नॉर्मल हो जाते हैं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माइक्रोग्रैविटी का शुरुआती प्रभाव पीढ़ियों के आगे बढ़ने के साथ कमज़ोर पड़ने लगता है।

स्पेस के तीन खतरे और प्रयोग की असली सच्चाई

अंतरिक्ष में जीवों को तीन मुख्य खतरों का सामना करना पड़ता है—माइक्रोग्रैविटी, कॉस्मिक रेडिएशन, और बिगड़ा हुआ दिन-रात का चक्र। इस प्रयोग से पता चला कि दो हफ्ते की यात्रा के बाद प्रजनन तंत्र पर इनका स्थायी नकारात्मक असर नहीं पड़ा।

हालांकि, वैज्ञानिक अभी इसे ‘फाइनल प्रूफ’ नहीं मान रहे हैं। एक केस के आधार पर हम विज्ञान में कोई पक्का नियम नहीं बना सकते, इसलिए इस विषय पर अभी और रिसर्च की आवश्यकता है।

अगला कदम: गगनयान और भविष्य के स्पेस प्रयोग

भविष्य में चीनी वैज्ञानिक मल्टी-जेनरेशन (Multi-Generation), लंबे समय के हेल्थ इफेक्ट्स और हार्मोनल बदलावों पर अलग-अलग अध्ययन करने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए वे चूहों को पूरे छह महीने स्पेस में रखने की तैयारी कर रहे हैं।

भारत का इसरो (ISRO) भी अपने ‘गगनयान’ (Gaganyaan) मिशन के जरिए इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। हम जानते हैं कि चूहों और इंसानों का जेनेटिक स्ट्रक्चर 85% तक मैच करता है।

अगर ये जीव स्पेस के रेडिएशन के बाद भी अपनी आबादी सुरक्षित रूप से बढ़ा सकते हैं, तो भारतीय स्पेस प्रोग्राम और भविष्य की स्पेस कॉलोनियों के लिए यह एक बहुत सकारात्मक संकेत है।

By Muhammad Sultan

मैं मुहम्मद सुल्तान हूँ, एक पैशनेट न्यूज़ राइटर। 'Global Update Today' के ज़रिए मेरी कोशिश रहती है कि दुनिया के हर कोने से साइंस, स्पेस और करंट अफेयर्स की वो ख़बरें आप तक लाऊँ, जो आपके लिए जानना ज़रूरी हैं। मेरी लिखी ख़बरों में आपको हमेशा डीप रिसर्च और आसान भाषा मिलेगी।

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