नासा के ‘आर्टेमिस 2’ मिशन के चार एस्ट्रोनॉट्स 10 दिन और 694,481 मील का सफर तय करने के बाद धरती पर लौट रहे हैं। स्पेसक्राफ्ट ‘ओरायन’ (Orion) का स्प्लैशडाउन भारतीय समयानुसार 11 अप्रैल, सुबह 5:37 बजे (अमेरिकी समयानुसार आज रात 8:07 बजे EDT) सैन डिएगो के तट पर प्रशांत महासागर में होगा। 61,326 मील की दूरी से धरती की ओर बढ़ते हुए क्रू ने ‘रन टू द वाटर’ और ‘फ्री’ गानों के साथ अपनी वापसी की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई एस्ट्रोनॉट जेरेमी हेन्सन की यह टीम 1 अप्रैल 2026 को रवाना हुई थी। मिशन के छठे दिन, जब यान ने चांद का फ्लाईबाय किया था — 1972 के बाद पहली बार — तब चारों एस्ट्रोनॉट्स ने अंतरिक्ष से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से सीधी बातचीत की थी। नासा के मिशन कंट्रोल की स्क्रीन पर उनका मुस्कुराता चेहरा पूरी दुनिया ने देखा था। अब नासा और अमेरिकी सेना की जॉइंट रिकवरी टीम ‘यूएसएस जॉन पी. मुर्था’ (USS John P. Murtha) शिप के साथ समंदर में अलर्ट पर है।
वायुमंडल में 35 गुना तेज रफ्तार और 3000 डिग्री की आग
शाम 7:33 बजे (EDT) क्रू मॉड्यूल अपने सर्विस मॉड्यूल से अलग होकर अपनी हीट शील्ड को आगे कर लेगा। जब यान 400,000 फीट की ऊंचाई पर धरती के वायुमंडल में प्रवेश करेगा, तो उसकी स्पीड आवाज की गति से 35 गुना ज्यादा होगी। इस घर्षण से पैदा होने वाला प्लाज्मा कैप्सूल की हीट शील्ड का तापमान 3,000 डिग्री फॉरेनहाइट तक बढ़ा देगा। एस्ट्रोनॉट्स को 3.9 Gs तक का भारी दबाव सहना होगा। इसी दौरान ठीक 6 मिनट तक ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ रहेगा, जिसमें यान का धरती और मिशन कंट्रोल से पूरी तरह संपर्क कट जाएगा।
आखिरी 13 मिनट: पैराशूट ही बचाएंगे चारों की जान
स्प्लैशडाउन से ठीक पहले, रात 8:03 बजे, जब कैप्सूल 22,000 फीट की ऊंचाई पर होगा, तो सबसे पहले ‘ड्रोग पैराशूट’ खुलेंगे। ये यान को स्थिर करेंगे। इसके ठीक एक मिनट बाद 6,000 फीट पर तीन मेन पैराशूट खुलेंगे। ये पैराशूट यान की रफ्तार को 136 मील प्रति घंटे से कम करके सिर्फ 20 मील प्रति घंटे कर देंगे। प्रशांत महासागर में सुरक्षित टचडाउन के बाद, अमेरिकी सेना के हेलिकॉप्टर क्रू को पानी से निकालकर सीधे रिकवरी शिप तक ले जाएंगे, जहां उनकी मेडिकल जांच होगी।
यह मिशन आर्टेमिस प्रोग्राम का दूसरा हिस्सा है। इससे पहले नवंबर 2022 में ‘आर्टेमिस I’ भेजा गया था, जो बिना इंसान वाला टेस्ट मिशन था। 1972 के अपोलो 17 के बाद यह पहला मौका है जब इंसानों ने चांद के इतने करीब जाकर वापसी की है। Artemis II का अगला पड़ाव Artemis III है, जिसमें इंसान दोबारा चांद की सतह पर उतरेगा। उस मिशन की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

