शनि. अप्रैल 11th, 2026

गगनयान मिशन: चिनूक हेलीकॉप्टर ने 3KM की ऊंचाई से गिराया 5.7 टन का मॉड्यूल, टेस्ट सफल

सफल टचडाउन के बाद भारतीय नौसेना के जहाज पर सुरक्षित रिकवर किया गया गगनयान मॉड्यूल। Credit: ISRO

शुक्रवार की सुबह श्रीहरिकोटा के तट पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन की एक और बड़ी परीक्षा में खरा उतरा। भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर ने 5.7 टन वजनी क्रू मॉड्यूल को 3 किलोमीटर की ऊंचाई से समुद्र में छोड़ा। 10 पैराशूट के सटीक तालमेल ने इस भारी-भरकम मॉड्यूल को सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतार दिया।

यह ‘इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट’ (IADT-02) का दूसरा चरण था। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित घर वापसी के लिए पैराशूट प्रणाली की मजबूती जाँचना था। इस मॉड्यूल का वजन ठीक उसी मानवरहित मिशन (G1) के बराबर रखा गया है, जिसे इसरो जल्द ही लॉन्च करने वाला है।

अगस्त 2025 में हुए पहले परीक्षण (IADT-01) की तुलना में इस बार मॉड्यूल का वजन 4.8 टन से बढ़ाकर 5.7 टन किया गया था। वैज्ञानिकों ने इस बदलाव के जरिए भारी दबाव के दौरान तकनीकी प्रणालियों के प्रदर्शन का बारीकी से विश्लेषण किया। अधिक वजन के साथ सफल लैंडिंग यह दर्शाती है कि सुरक्षा मानक अब पहले से अधिक विश्वसनीय हो चुके हैं।

हवा में रिलीज होते ही चार अलग-अलग श्रेणियों के कुल 10 पैराशूट एक तय समय सीमा के भीतर खुले। इस जटिल प्रक्रिया ने मॉड्यूल की गिरती रफ्तार को धीरे-धीरे कम किया। यह मंदी (Deceleration) प्रणाली अंतरिक्ष यात्रियों को लैंडिंग के समय लगने वाले झटके से बचाने के लिए अनिवार्य है।

इसरो ने मिशन की प्रगति पर संतोष जाहिर करते हुए अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह परीक्षण गगनयान G1 मिशन की तैयारी की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

समुद्र से रिकवरी और नौसेना की भूमिका

सफल टचडाउन के बाद श्रीहरिकोटा तट के पास तैनात भारतीय नौसेना की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाला। नौसेना के विशेष जहाजों और अनुभवी टीमों की मदद से सिमुलेटेड क्रू मॉड्यूल को सफलतापूर्वक पानी से बाहर निकाला गया। इस पूरे अभियान में डीआरडीओ (DRDO) के विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग दिया।

यह सफलता 2027 के प्रस्तावित मानव मिशन के लिए एक मजबूत वैज्ञानिक आधार तैयार करती है। वैज्ञानिकों के पास अब वह विश्वसनीय डेटा मौजूद है, जो अंतरिक्ष से लौटते समय मॉड्यूल की स्थिरता और गति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है। भारत अब स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता हासिल करने के बेहद करीब पहुंच गया है।

भारत के पहले व्योमनाॅट की उड़ान अब सिर्फ एक तकनीकी सपना नहीं — यह एक परखी हुई तैयारी है।

By Muhammad Sultan

मैं मुहम्मद सुल्तान हूँ, एक पैशनेट न्यूज़ राइटर। 'Global Update Today' के ज़रिए मेरी कोशिश रहती है कि दुनिया के हर कोने से साइंस, स्पेस और करंट अफेयर्स की वो ख़बरें आप तक लाऊँ, जो आपके लिए जानना ज़रूरी हैं। मेरी लिखी ख़बरों में आपको हमेशा डीप रिसर्च और आसान भाषा मिलेगी।

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