Florida के स्पेस कोस्ट और समुद्री किनारों पर आज करीब 4 लाख लोगों की भारी भीड़ जमा है। इलाके के होटलों में कमरे खत्म हो चुके हैं, क्योंकि स्प्रिंग ब्रेकर्स और स्पेस फैंस दुनिया भर से यहाँ पहुँच रहे हैं। हर कोई आसमान की तरफ देख रहा है — एक ऐसा नज़ारा देखने के लिए जो पिछले 54 सालों में किसी ने नहीं देखा।
आज शाम 6:24 बजे (ईस्टर्न टाइम), इंसानों से भरा एक NASA रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा को छोड़ देगा। लॉन्च डायरेक्टर चार्ली ब्लैकवेल-थॉम्पसन ने सुबह 7:33 बजे ही रॉकेट में फ्यूल भरने का क्रिटिकल ऑर्डर दे दिया था।
7.5 लाख गैलन सुपर-कोल्ड फ्यूल
फ्लाइट कंट्रोलर्स फिलहाल 322-फुट लंबे स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के कोर स्टेज में ‘फास्ट-फिल’ प्रोसेस चला रहे हैं। विशाल ऑरेंज रंग के इस फर्स्ट स्टेज में सुपर-कोल्ड लिक्विड ऑक्सीजन और लिक्विड हाइड्रोजन तेज़ी से भरी जा रही है।
पृथ्वी की ग्रेविटी को तोड़ने के लिए इस रॉकेट को 7.5 लाख (750,000) गैलन से ज़्यादा इस बेहद अस्थिर (volatile) फ्यूल की ज़रूरत है। क्योंकि लिक्विड हाइड्रोजन, लिक्विड ऑक्सीजन से ज़्यादा तेज़ी से बहता है, इसलिए लॉन्च कंट्रोल टीम दोनों को एक साथ लोड करके फ्यूल भरने का कुल समय बचा रही है।
आज तड़के ही टीमों ने ऑटोमेटेड ग्राउंड लॉन्च सीक्वेंसर को एक्टिवेट कर दिया था। यह सिस्टम उड़ान से कुछ मिनट पहले हज़ारों कमांड्स को कंट्रोल करता है, जिसमें वाल्व की सही मूवमेंट और टाइमिंग शामिल है।
इंजीनियर्स ने रॉकेट की cavities से हवा हटाकर नाइट्रोजन भर दी है, ताकि क्रायोजेनिक फ्यूलिंग से पहले ऑक्सीजन और नमी का कोई खतरा न रहे।
4 एस्ट्रोनॉट्स, 10 दिन और 6.85 लाख मील का सफर
Artemis II के चारों एस्ट्रोनॉट्स दोपहर के करीब उठेंगे ताकि अपनी उड़ान की तैयारी कर सकें। इस मिशन में वे चाँद की सतह पर नहीं उतरेंगे, बल्कि यह एक ‘लूनर फ्लाईबाय’ (Moon flyby) टेस्ट फ्लाइट है जिसे डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन की सीमाएँ परखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस मिशन के कमांडर हैं अमेरिकी नेवी वेटरन रीड वाइसमैन, जिन्होंने 2014 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर छह महीने बिताए थे। उनके ठीक बगल में पायलट सीट पर विक्टर ग्लोवर होंगे। ग्लोवर चाँद का चक्कर लगाने वाले पहले अश्वेत (Black) एस्ट्रोनॉट बनकर इतिहास रचने जा रहे हैं।
इस क्रू में दो और बेहद खास नाम शामिल हैं — क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन।
2019 में पहले ‘ऑल-फीमेल स्पेसवाक’ का हिस्सा रहीं कोच अब किसी लूनर मिशन पर उड़ान भरने वाली पहली महिला बनेंगी। कोच ने अपनी इस उपलब्धि पर कहा, “अगर जश्न मनाने लायक कुछ है, तो वह यह कि आज सपने देखने वाले हर इंसान को उसे पूरा करने के लिए समान रूप से मेहनत करने का मौका मिल रहा है।”
वहीं, कनाडाई स्पेस एजेंसी के हैनसेन पृथ्वी की कक्षा छोड़ने वाले पहले गैर-अमेरिकी (non-American) इंसान बनने जा रहे हैं।
एक साथ मिलकर, यह क्रू इंसानी इतिहास में पृथ्वी से सबसे दूर जाने वाला दल बनेगा। उड़ान के छठे दिन तक, वे चाँद के उस पार (far side) 4,600 मील से भी आगे निकल जाएंगे।
यह रास्ता उन्हें घर से लगभग 253,000 मील की दूरी पर ले जाएगा। यह आधिकारिक तौर पर अप्रैल 1970 में अपोलो 13 मिशन द्वारा बनाए गए दूरी के रिकॉर्ड को तोड़ देगा।
5-मीटर के छोटे कैप्सूल में 10 दिन
इस सफर का मतलब है लगातार 10 दिनों तक ओरियन (Orion) स्पेस कैप्सूल के अंदर रहना। इस कैप्सूल का व्यास (diameter) केवल 5 मीटर है, यानी अंदर से यह जगह एक छोटी सी कैंपर वैन जितनी ही है।
वाइसमैन ने पत्रकारों से कहा, “एक छोटे से कैप्सूल में 10 दिन तक पेन का ढक्कन टिक-टिक करने जैसी छोटी बात भी किसी को गुस्सा दिला सकती है।” उन्होंने माना कि इतनी कम जगह छठे या सातवें दिन तक उनके धैर्य का इम्तिहान लेगी, लेकिन ट्रेनिंग के दौरान क्रू ने आपस में बहुत ईमानदार बातचीत कायम रखी है।
इस दौरान हर कदम पर उनकी सेहत की निगरानी की जाएगी, जिसमें ज़्यादा रेडिएशन और माइक्रोग्रैविटी के प्रभावों की कड़ी स्टडी शामिल है। प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में उतरने के साथ यह 6.85 लाख मील (685,000-mile) की लंबी यात्रा खत्म होगी।
इस उड़ान का एक अहम हिस्सा चाँद के साउथ पोल की 4,000 से 6,000 मील की ऊंचाई से तस्वीरें लेना है। यह डेटा अगले इंसान के उतरने और भविष्य के मून बेस के लिए सही जगह खोजने में मदद करेगा। साथ ही एस्ट्रोनॉट्स उन लाइफ-सपोर्ट सिस्टम्स को भी टेस्ट करेंगे जिनकी ज़रूरत 2028 के Artemis IV मिशन में पड़ेगी।
मौसम की कड़ी शर्तें और खतरे
लॉन्चपैड से कोई भी तब तक नहीं उठ सकता, जब तक प्रकृति साथ न दे। अमेरिकी स्पेस फोर्स के साथ NASA के मौसम अधिकारी लगातार हालात पर नज़र रखे हुए हैं, और फिलहाल मौसम के अनुकूल रहने की 80% संभावना है।
अगर 24-घंटे का औसत तापमान 41.4 डिग्री फ़ारेनहाइट से नीचे गिरता है, तो रॉकेट में फ्यूल भरना शुरू भी नहीं किया जा सकता। दूसरी तरफ, अगर तापमान 30 मिनट तक लगातार 94.5 डिग्री से ऊपर रहता है, तो लॉन्च रोक दिया जाएगा।
तेज़ हवा एक और बड़ा खतरा है। अगर तय ऊंचाइयों पर उड़ते वक्त हवा की रफ्तार 29 से 39 नॉट्स के बीच पहुँचती है, तो उड़ान टाल दी जाएगी।
आसमानी बिजली तुरंत एक ‘हार्ड स्टॉप’ लगा देती है। अगर उड़ान के रास्ते से 10 नॉटिकल मील के दायरे में एक भी बिजली गिरती है, तो लॉन्च को 30 मिनट के लिए रोक दिया जाता है। अगर फ्लाइट का रास्ता अगले तीन घंटे तक किसी तूफानी बादल के मलबे से 3 नॉटिकल मील के दायरे में आता है, तो लॉन्च नहीं होगा।
अंतरिक्ष का मौसम भी एक बड़ा रोल प्ले करता है। NASA किसी खतरनाक ‘सोलर एक्टिविटी’ (सौर तूफान) के दौरान लॉन्च नहीं करेगा। सोलर पार्टिकल्स की भारी मात्रा रॉकेट के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को खराब कर सकती है और उसका रेडियो कनेक्शन काट सकती है।
लॉन्चपैड 39B पर आखिरी उलटी गिनती
आज सुबह ही, इंजीनियर्स ने रॉकेट के चारों RS-25 इंजनों के ज़रूरी हेल्थ चेक पूरे कर लिए हैं। टीमों ने ओरियन स्पेसक्राफ्ट की फ्लाइट बैटरियों को भी फुल चार्ज कर दिया है, ताकि लाइफ सपोर्ट सिस्टम्स को भरोसेमंद पावर मिल सके।
कैप्सूल के अंदर, इंजीनियर्स ने एस्ट्रोनॉट्स के प्रेशर सूट की भी बारीकी से चेकिंग की है ताकि केबिन के डिप्रेशराइज़ होने की स्थिति में एयरटाइट सील सुरक्षित रहें। आज रात, लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B से सभी गैर-ज़रूरी कर्मचारियों को हटा दिया जाएगा।
यह मिशन उस 20 बिलियन डॉलर ($20 billion) के मून बेस प्रोजेक्ट की नींव है जिसे इस दशक के अंत तक बनाने की योजना है। NASA एडमिनिस्ट्रेटर जारेड इसाकमैन ने इस साल की शुरुआत में पत्रकारों से कहा था कि जब अमेरिका चाँद पर लौटेगा, तो वे वहाँ टिकने के लिए जा रहे हैं।
लेकिन खुद एस्ट्रोनॉट्स इस ऐतिहासिक पल को सिर्फ एक शुरुआत मानते हैं। विक्टर ग्लोवर ने एक इंटरव्यू में बिल्कुल सटीक बात कही: “हम चाहते हैं कि हमें जल्दी भुला दिया जाए, ताकि आप आगे आने वाले नए क्रू का इंटरव्यू लें।”

