मंगल. अप्रैल 21st, 2026

Blue Origin का तीसरा मिशन आंशिक विफल, BlueBird 7 गलत कक्षा में

SLC-36 लॉन्च पैड पर खड़ा ब्लू ओरिजिन का न्यू ग्लेन रॉकेट। ( Image credit: Blue Origin Media. )

फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से रविवार सुबह एक अहम अंतरिक्ष मिशन ने उड़ान भरी। यह मिशन सीधे स्मार्टफोन पर 4G और 5G नेटवर्क पहुंचाने के लिए था। लेकिन, न्यू ग्लेन रॉकेट के ऊपरी चरण की तकनीकी चूक के कारण एएसटी स्पेस-मोबाइल का सैटेलाइट अपनी सही कक्षा में नहीं पहुंच सका।

जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन का भारी-भरकम ‘न्यू ग्लेन’ रॉकेट अपने तीसरे मिशन पर था। इस उड़ान में एएसटी स्पेस-मोबाइल का ‘ब्लू-बर्ड 7’ सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा गया था। एएसटी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि यह सैटेलाइट अब काम नहीं कर पाएगा।

लॉन्च के कुछ घंटों बाद एएसटी स्पेस-मोबाइल ने एक बयान जारी कर स्थिति साफ की। कंपनी ने कहा, “न्यू ग्लेन 3 मिशन के दौरान, ऊपरी चरण ने ब्लू-बर्ड 7 को तय सीमा से काफी निचली कक्षा में स्थापित कर दिया।” इस गलत कक्षा के कारण सैटेलाइट का काम करना असंभव हो गया है।

एएसटी ने स्पष्ट किया कि सैटेलाइट के थ्रस्टर्स उसे सही ऊंचाई तक ले जाने में सक्षम नहीं हैं। कंपनी के बयान के अनुसार, “यद्यपि सैटेलाइट रॉकेट से अलग होकर चालू हो गया है, लेकिन ऊंचाई बहुत कम होने के कारण ऑन-बोर्ड थ्रस्टर तकनीक से काम जारी नहीं रखा जा सकता।”

इंश्योरेंस से नुकसान की भरपाई और डी-ऑर्बिटिंग

इस स्थिति में अब सैटेलाइट को डी-ऑर्बिट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इसका सीधा मतलब यह है कि इसे पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाया जाएगा। वायुमंडल में प्रवेश करते ही यह सैटेलाइट पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।

इस सैटेलाइट की असल निर्माण लागत का खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया है। हालांकि, एएसटी ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह बीमित (Fully Insured) सैटेलाइट था। इस वजह से कंपनी को अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत वित्तीय नुकसान की पूरी भरपाई होने की उम्मीद है।

रविवार सुबह 7:25 बजे यह मिशन फ्लोरिडा के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 36 से शुरू हुआ। उड़ान से ठीक पहले काउंटडाउन में 40 मिनट की एक अस्पष्ट रोक (Unexplained hold) दर्ज की गई थी।

इस रोक के बाद रॉकेट के सात मीथेन-आधारित BE-4 इंजनों ने 38 लाख पाउंड के थ्रस्ट के साथ सफल उड़ान भरी। तीन मिनट और नौ सेकंड बाद रॉकेट का पहला चरण मुख्य हिस्से से अलग हो गया।

ऊपरी चरण के इंजन और दूसरी फायरिंग

पहला हिस्सा अलग होने के बाद दूसरे चरण ने अपना काम शुरू किया। इसे शक्ति देने के लिए रॉकेट में दो BE-3 इंजन लगे हुए थे। लॉन्च के करीब ढाई मिनट बाद दूसरे चरण के इन इंजनों को योजना के मुताबिक बंद कर दिया गया।

लॉन्च के एक घंटे और 10 मिनट बाद इस ऊपरी चरण के इंजनों को दूसरी बार फायर किया जाना था। लेकिन ब्लू ओरिजिन ने इस फायरिंग को लेकर कोई अपडेट नहीं दिया। यह स्पष्ट नहीं है कि दूसरी फायरिंग वास्तव में हुई या वह अपने पूरे समय तक चली थी।

न्यू ग्लेन रॉकेट के ये इंजन ब्लू ओरिजिन की हंट्सविले स्थित फैसिलिटी में बनाए जाते हैं। इस रॉकेट में इस्तेमाल होने वाले दोनों तरह के इंजनों का निर्माण विशेष रूप से इसी निर्माण केंद्र में किया जाता है।

अपनी श्रेणी का सबसे बड़ा civilian एंटीना

इस उड़ान में भेजा गया ब्लू-बर्ड 7 सामान्य सैटेलाइट्स की तुलना में काफी अलग था। इसमें 2,400-square-foot का विशाल ‘फेज्ड एरे एंटीना’ लगा हुआ था। यह अपनी श्रेणी का अब तक का सबसे बड़ा civilian एंटीना था, जिसे लो-अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने की योजना थी।

यह सैटेलाइट एएसटी के डायरेक्ट-टू-सेल (Direct-to-cell) ब्रॉडबैंड नेटवर्क का एक हिस्सा था। इस तकनीक का मुख्य काम बिना किसी जमीनी टावर के सीधे स्मार्टफोन पर नेटवर्क देना है। ब्लू-बर्ड 7 कंपनी की अगली पीढ़ी (Next-generation) के ब्लॉक 2 नेटवर्क का दूसरा सैटेलाइट था।

एएसटी स्पेस-मोबाइल की योजना भविष्य में 60 तक ‘ब्लॉक टू’ ब्लू-बर्ड सैटेलाइट्स का नेटवर्क तैयार करने की है। कंपनी इस भारी लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्पेसएक्स के फाल्कन 9 और भारत के LVM3 रॉकेट्स का भी इस्तेमाल कर रही है।

दोबारा इस्तेमाल होने वाले बूस्टर की सुरक्षित वापसी

जहां एक तरफ सैटेलाइट अपनी कक्षा में पहुंचने में विफल रहा, वहीं ब्लू ओरिजिन ने अपने बूस्टर को सुरक्षित वापस लाने में सफलता पाई। लॉन्च के करीब 9 मिनट 20 सेकंड बाद रॉकेट का पहला चरण अटलांटिक महासागर में मौजूद एक ड्रोन शिप पर सटीक उतरा।

यह 29 मंजिला भारी न्यू ग्लेन रॉकेट का तीसरा मिशन था। लेकिन यह पहला मौका था जब किसी इस्तेमाल किए गए पहले चरण को दोबारा उड़ान के लिए उपयोग किया गया। इस रिकवर किए गए बूस्टर का नाम ‘नेवर टेल मी द ऑड्स’ रखा गया है।

बूस्टर का यह नाम हॉलीवुड किरदार हान सोलो के डायलॉग से लिया गया है, जो फिल्म ‘द एम्पायर स्ट्राइक्स बैक’ में था। इसी बूस्टर ने पिछले साल नवंबर में दूसरे मिशन (NG-2) के दौरान भी सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी और सुरक्षित वापस लौटा था।

इस मिशन में इंजनों को लेकर कंपनी ने कुछ नए तकनीकी परीक्षण भी किए थे। ब्लू ओरिजिन के सीईओ डेव लिम्प ने कहा, “अपने पहले रिफर्बिश्ड बूस्टर के साथ हमने सभी सात इंजनों को बदलने और कुछ अपग्रेड टेस्ट करने का फैसला किया था। हम इन इंजनों का उपयोग भविष्य में करेंगे।”

स्पेसएक्स से सीधी टक्कर और आगे के लॉन्च लक्ष्य

ब्लू ओरिजिन का न्यू ग्लेन रॉकेट विशेष रूप से बड़े पेलोड अंतरिक्ष में ले जाने के लिए बनाया गया है। इसमें सात मीटर (23 फुट) का नोज कोन लगा है, जो एक उड़ान में कई सैटेलाइट्स ले जा सकता है। यह स्पेसएक्स के फाल्कन 9 को कमर्शियल मार्केट में टक्कर देने के लिए डिजाइन किया गया है।

न्यू ग्लेन के वाइस प्रेसिडेंट जॉर्डन चार्ल्स ने इसके डिजाइन के पीछे की सोच को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया, “हमने बुनियादी तौर पर न्यू ग्लेन को इस सोच के साथ विकसित किया है कि आज से 50 से 100 साल बाद अंतरिक्ष कैसा दिखने वाला है।”

इस विफलता के बावजूद एएसटी स्पेस-मोबाइल ने अपना production schedule जारी रखा है। कंपनी ने बताया है कि अगले 30 दिनों के भीतर ब्लू-बर्ड 8 से 10 शिपिंग के लिए तैयार हो जाएंगे। कंपनी वर्तमान में ब्लू-बर्ड 32 तक का निर्माण कर रही है।

एएसटी स्पेस-मोबाइल साल 2026 के अंत तक अंतरिक्ष में करीब 45 सैटेलाइट्स स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए कंपनी 2026 के दौरान हर एक से दो महीने में औसतन एक ऑर्बिटल लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है।

जेफ बेजोस की कंपनी इस साल के अंत तक अमेजन के एलईओ (LEO) इंटरनेट सैटेलाइट लॉन्च करना चाहती है।

कंपनी ने नवंबर में जानकारी दी थी कि वह न्यू ग्लेन रॉकेट का एक अधिक शक्तिशाली संस्करण बनाएगी। इस नए और उन्नत वैरिएंट को ‘न्यू ग्लेन 9×4’ नाम दिया गया है।

ब्लू ओरिजिन नासा के अंतरिक्ष यात्रियों और उनके कार्गो को चंद्रमा तक पहुंचाने के लिए मून लैंडर्स भी विकसित कर रही है। कंपनी की योजना इस गर्मी या शुरुआती पतझड़ तक ‘ब्लू मून लैंडर’ के प्रोटोटाइप की एक अनपायलटेड टेस्ट फ्लाइट आयोजित करने की है।

By Muhammad Sultan

मैं मुहम्मद सुल्तान हूँ, एक पैशनेट न्यूज़ राइटर। 'Global Update Today' के ज़रिए मेरी कोशिश रहती है कि दुनिया के हर कोने से साइंस, स्पेस और करंट अफेयर्स की वो ख़बरें आप तक लाऊँ, जो आपके लिए जानना ज़रूरी हैं। मेरी लिखी ख़बरों में आपको हमेशा डीप रिसर्च और आसान भाषा मिलेगी।

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